करनन ने आखिरकार माना कि वो मानसिक संतुलन खो बैठे थे

Feb 24 2016 12:17 PM
करनन ने आखिरकार माना कि वो मानसिक संतुलन खो बैठे थे

चेन्नई : मद्रास उच्च न्यायलय के जस्टिस सी एस करनन ने आखिरकार अपनी गलती मान ही ली। उन्होने यह स्वीकार किया कि उन्होने एक त्रुटिपूर्ण आदेश जारी किया था, क्योंकि हताशा के कारण उनका मानसिक संतुलन बिगड़ गया था। न्यायमूर्ति करनन उस वक्त चर्चा में आए थे, जब उन्होने प्रधान न्यायधीश के उस आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसमें उनका ट्रांसफर कोलकाता उच्च न्यायलय में किया गया था। देश के प्रधान न्यायधीश और उच्चतम न्यायलय के दो न्यायधीशों जे एस खेहर और आर भानुमति को भेजे एक पत्र में करनन ने कहा है कि वो एक साथ हुई कई घटनाओं से परेशान थे, जिनमें कुछ जजों ने उनका उपहास भी किया था।

करनन ने कहा कि 15 फरवरी को मैंने एक त्रुटिपूर्ण आदेश भेजा था, क्यों कि मैं हताश था, जिसके कारण मैं अपना मानसिक संतुलन खो बैठा था। पत्र में उन्होने यह भी लिखा कि सबके प्रति मैं अपना सौहार्दपूर्ण रवैया कायम रखूंगा और सबकी नम्र प्रतिक्रिया के लिए आभारी रहूंगा। उन्होने अपनी बात को और अधिक मजबूता से रखने के लिए उत्पीड़न और उपहास के दो उदाहरणों का भी जिक्र किया है।

उन्होने कहा कि तीन साल पहले ही अनुसूचित जाति व जनजाति आयोग के अध्यक्ष व अन्य गणमान्य लोगों को शिकायत भेजी गई थी। करनन ने कहा कि मीडिया ने उस समय भी घटना का जिक्र करते हुए कहा था कि न्यायधीशों के नाम का खुलासा किया जाए।