कोरोना की वजह से चीन का कपडा बाजार हो रहा है ख़त्म, कॉटन यार्न हो सकता है सस्ता

कोरोना की वजह से चीन का कपडा बाजार हो रहा है ख़त्म, कॉटन यार्न हो सकता है सस्ता

देश के कपड़ा बाजार से चीन एवं बांग्लादेश के दबदबे को खत्म करने के लिए टेक्सटाइल मंत्रालय जल्द ही नई टेक्सटाइल पॉलिसी लाने जा रहा है। इसके अलावा पॉलिसी के तहत कम लागत पर टेक्साइल उद्योग की उत्पादन क्षमता का विस्तार किया जा सकता है । वैश्विक स्तर पर भारतीय टेक्सटाइल को मुकाबले में खड़ा करने के लिए कई नए उपाए किए जाएंगे।वहीं  इनमें भारतीय कपड़ों की वैश्विक ब्रांडिंग, उत्पादन में उच्च तकनीक का उपयोग और बड़े ऑर्डर को तय समय में डिलीवरी देने की क्षमता की स्थापना करना है। इसके अलावा टेक्सटाइल उद्योग के लिए श्रम नियमों में भी परिवर्तन की बात चल रही है। ऐसे में कंफेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री (सिटी) के चेयरमैन टी. राजकुमार के मुताबिक भारत में चलने वाले ग्लोबल ब्रांड के रिटेल स्टोर्स में चीन, बांग्लादेश और श्रीलंका के गारमेंट्स बड़ी मात्र में होते हैं। 

इसके अलावा उन्होंने बताया कि टेक्सटाइल मंत्री स्मृति ईरानी की अध्यक्षता वाली एक बैठक में ब्रांडेड रिटेल स्टोर्स वालों ने कहा था कि भारत में उनकी मांगों को पूरा करने के लायक बड़े गारमेंट निर्माता नहीं हैं। वहीं उन ब्रांडेड रिटेल स्टोर्स वालों ने बताया कि कम लागत और एक साथ भारी मात्र में सप्लाई मिलने के कारण वे भारत स्थित अपने स्टोर के लिए चीन, बांग्लादेश और श्रीलंका से गारमेंट का आयात करते हैं।मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार सरकार चाहती है कि भारत टेक्सटाइल के क्षेत्र में ग्लोबल लीडर बने जिससे सिर्फ भारत ही नहीं दुनियाभर के रिटेल स्टोर में भारत में निर्मित गारमेंट की बिक्री हो। इसके साथ ही टीटी टेक्सटाइल के एमडी संजय जैन कहते हैं, ‘बीते एक माह से टेक्सटाइल मंत्रलय के सचिव रवि कपूर के नेतृत्व में टेक्सटाइल पॉलिसी को लेकर गहन विमर्श चल रहा है। विभिन्न स्टेकहोल्डर्स के साथ कई राउंड की बैठक हो चुकी है।’ 

सिटी के अनुसार नई पॉलिसी के तहत टेक्सटाइल क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआइ) को आकर्षित करने के साथ जॉइंट वेंचर प्रोजेक्ट लाने के लिए आकर्षक नियम बनाए जा सकते हैं। वहीं, प्रस्तावित मेगा टेक्सटाइल पार्क में एक ही साथ टेक्सटाइल के हर सेक्टर जैसे कि यार्न, फैब्रिक और गारमेंट की एकीकृत यूनिट की स्थापना करने की सहूलियत देने का भी प्रावधान होगा। मैन्यूफैक्चरिंग के लिए कम लागत पर पानी, बिजली, तकनीकी सहायता जैसी इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधा का भी ख्याल रखा जा सकता है ।

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