नौकरीपेशा लोगों को बड़ा झटका, मिनिमम वेज और बोनस काटने की तैयार में कंपनियां

नई दिल्ली: यदि आप किसी कंपनी में नौकरी करते हैं तो आपके लिए बुरी खबर है. साल में आपको जो बोनस मिलता है और महीने में वेतन के जो मिनिमम रुपये मिलते हैं, उस पर कंपनियों की नजर है. कंपनियां चाहती हैं कि दो-तीन वर्ष के लिए ऐसा नियम बन जाए कि इसका भुगतान ही ना करना पड़े. कंपनी अपने अनुकूल नियम बनाकर ऐसा करना चाहती हैं. कंपनियों ने ये सुझाव केंद्र सरकार को भेजे हैं. कंपनियों की ये बात यदि सरकार ने मानी तो यह नियम लागू भी हो सकते हैं.

एम्प्लॉयर्स एसोसिएशन के तत्वाधान में कंपनियों के प्रतिनिधियों ने श्रम मंत्री संतोष गंगवार से मुलाक़ात की. फिर एसोसिएशन ने कुछ सुझाव दिए हैं. सरकार से आग्रह किया गया है कि दो-तीन साल के लिए श्रम कानूनों में रियायत दी जाए ताकि कर्मचारियों को न तो मिनिमम वेज देना पड़े और न ही बोनस देना पड़े. जो वेतन कर्मचारियों को देंगे या जो दिहाड़ी मजदूरों को देंगे वो Corporate Social Responsibility के अंतर्गत आए. इसके तहत कंपनियों को भलाई के काम में सरकारर रियायत देती है.

यह भी कहा कि काम करने के समय को 12 घंटे तक बढ़ा दिया जाए. मजदूरों के साथ होने वाले विवाद के लिए डिस्प्यूट एक्ट में भी रियायत दी जाए ताकि लेबर मामलों में मुकदमेबाजी का चक्कर कम हो. कारखाना चलाने के लिए मिनिमम 50 फीसद कर्मचारी की इजाजत दी जाए. अभी‌ लॉकडाउन खुलने के बाद एक तिहाई कर्मचारी के लिए इजाजत मिली है.

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