अयोध्या मामला: रामलला विराजमान ने SC में कहा- केवल नमाज़ पढ़ लेने से जगह पर कब्ज़ा नहीं हो जाता...

Aug 16 2019 01:15 PM
अयोध्या मामला: रामलला विराजमान ने SC में कहा- केवल नमाज़ पढ़ लेने से जगह पर कब्ज़ा नहीं हो जाता...

नई दिल्‍ली: 16 अगस्‍त को अयोध्‍या राम मंदिर और बाबरी मस्जिद मामले की सुनवाई के सातवें दिन रामलला विराजमान की तरफ से पेश सीनियर वकील एडवोकेट एस वैद्यनाथन ने विवादित ज़मीन के नक्शे और फोटोग्राफ अदालत के सामने पेश किए. उन्‍होंने कहा कि खुदाई के दौरान मिले खंभों में श्रीकृष्ण, शिव तांडव और श्रीराम के बाल रूप की तस्वीर दिखाई देती है. सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि पक्के निर्माण में जहां तीन गुंबद बनाए गए थे, वहां बाल रूप में राम की प्रतिमा थी. सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि केवल नमाज़ अदा करने से वह स्थान उनका नहीं हो सकता जब तक वह आपकी संपत्ति न हो.

वैद्यनाथन ने कहा कि मुस्लिम समुदाय द्वारा गली में नमाज पढ़ने से यह नहीं समझा जाना चाहिए कि उनके मालिकाना हक का दावा बनता है. विवादित ज़मीन पर मुस्लिमों ने कभी नमाज़ पढ़ी हो, इस वजह से उनका ज़मीन पर कब्ज़ा नहीं हो जाता. यदि गली में नमाज़ पढ़ी जाती है, तो इसका अर्थ ये नहीं कि नमाज़ पढ़ने वालों का गली पर कब्ज़ा हो गया. सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि मस्जिद में मानवीय या जीव जंतुओं की प्रतिमाएं नहीं हो सकती हैं, मस्जिदें सामूहिक साप्ताहिक और रोज़ाना प्रार्थना के लिए होती हैं. सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील राजीव धवन ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि कहीं पर भी नमाज़ अदा करने की बात गलत है, यह इस्लाम की ठीक व्याख्या नहीं है.

सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि मस्जिदों में देवताओं की तस्वीरों वाले खंभे नहीं हुआ करते. खंभों और छत पर बनी प्रतिमाएं, तस्वीर मंदिरों में ही होते हैं और हिन्दू परंपरा भी यही है. सीएस वैद्यनाथन ने कहा कमिश्नर की रिपोर्ट में पाषाण स्तंभों पर राम जन्मभूमि यात्रा का उल्लेख है. न्यायमूर्ति भूषण ने कहा कि 1950 में ली गई तस्वीरें 1990 की तस्वीरों से अधिक भरोसेमंद हैं. न्यायमूर्ति बोबड़े ने पूछा कि प्रतिमाओं की कार्बन डेटिंग हुई है क्या? मुस्लिम पक्ष ने कहा कि ईंटों की कार्बन डेटिंग नहीं की जा सकती, क्योंकि कार्बन डेटिंग तभी हो सकती है जब उसमें कार्बन मौजूद हो. 

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