100 करोड़ की वसूली मामले में ED ने दायर की चार्जशीट, हुए चौकाने वाले खुलासे

मुंबई: महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख की मुश्किलें एक बार फिर से बढ़ गईं हैं। जी दरअसल हाल ही में मिली जानकारी के तहत उन्होंने API (अब बर्खास्त) सचिन वझे को अपने निजी सहायक कुंदन शिंदे को सह्याद्री गेस्ट हाउस के बाहर और राजभवन के पास दो अलग-अलग मौकों पर 4.6 करोड़ रुपये कैश से भरे 16 बैग सौंपने का निर्देश दिया था। जी हाँ और इस बात का खुलासा प्रवर्तन निदेशालय (ED) की तरफ से विशेष PMLA कोर्ट में दायर चार्जशीट में हुआ है। बताया जा रहा है अनिल देशमुख के कहने पर वझे ने यह पैसे शहर के बार मालिकों से वसूले थे। आप सभी को बता दें कि जो चार्जशीट दायर हुई है उसमे सचिन वझे के साथ ED ने कुछ शैक्षणिक संस्थानों को चलाने वाले एक ट्रस्ट और नवी मुंबई की एक कंपनी को भी शामिल किया है।

बताया जा रहा है कई सौ करोड़ की संपत्ति का मालिकाना हक रखने वाली इस कंपनी का स्वामित्व देशमुख के परिवार के लोगों के पास है। इसी के साथ ED ने देशमुख के प्राइवेट सेक्रेटरी संजीव पलांडे और PA शिंदे के खिलाफ चार्जशीट दायर की है। बताया जा रहा है दोनों को ED ने गिरफ्तार किया था, और अभी वह जेल में बंद हैं। दायर हुई चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि जनवरी 2021 में अनिल देशमुख ने सचिन वझे को बुलाया उसे जमा किए गए 1.6 करोड़ रुपए पांच बैग में भरकर उनके PA कुंदन शिंदे को सह्याद्री गेस्ट हाउस के बाहर सौंपने के लिए कहा था।

इसके अलावा जांच में यह सामने आ चुका है कि शिंदे पैसे लेने देशमुख की मर्सिडीज कार में आए थे। वहीं इसके बाद फरवरी के महीने में एक बार फिर देशमुख ने सचिन वझे को बुलाया और अब तक जमा कैश को उन्हें सौंपने को कहा। यह सब होने के बाद उन्होंने अपने PA को राजभवन सिग्नल पर भेजा और उसने वझे से 11 बैग लिए थे। इसमें तकरीबन 3 करोड़ कैश था। वहीं चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि देशमुख ने इसमें से कुछ पैसे को अपने बेटे हृषिकेश देशमुख के माध्यम से दिल्ली की एक पेपर कंपनी तक पहुंचाया और बचे हुए पैसे को दान की आड़ में श्री साईं शिक्षण संस्थान ट्रस्ट को भेज दिया था।

आपको बता दें कि इस ट्रस्ट पर देशमुख और उनके परिवार का नियंत्रण है। ऐसे में चार्जशीट में कहा गया है कि ट्रस्ट का इस्तेमाल 2013 से अवैध धन को खपाने के लिए किया जा रहा है? वहीं दूसरी तरफ यह भी सामने आया है कि इन आरोपों के बावजूद ED ने अपनी चार्जशीट में अनिल देशमुख को आरोपी नहीं बनाया है। जी दरअसल ED का कहना है कि कई बार बुलाने के बावजूद देशमुख पूछताछ के लिए नहीं आए, इसलिए अभी यह तय नहीं हुआ है कि वे मनी लॉन्ड्रिंग के पूरे खेल में किस तरह शामिल थे।

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