लॉकडाउन में साढे चार करोड़ से ज्यादा लोगों की भूख मिटा चुका है यह फाउंडेशन

यह बात तो आप भी जानते है कि दुनिया में रोजाना करोड़ों लोगों को भरपेट भोजन नहीं मिलता है. कोविड-19 के दौरान यह संकट और गहरा गया है. ऐसे में बहुत से लोगों के सामने परिवार का पेट भरना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है. हालांकि इस अंधेरे में रोशनी की मशाल थामे कई संगठन चुपचाप लोगों को भोजन करा रहे हैं. भारत में अक्षय पात्र फाउंडेशन भी इस संकट में लोगों की मदद के लिए आगे आया है. पहले लॉकडाउन से अब तक साढे चार करोड़ से ज्यादा लोगों को यह संगठन भोजन करा चुका है. देश में 55 स्थानों पर अक्षय पात्र की रसोई में भोजन पकता है और खाली पेट की क्षुधा शांत करता है.

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आपकी जानकारी के लिए बता दे कि साल 2000 में अक्षय पात्र 5 स्कूलों के 1500 बच्चों को मिड-डे मील खिलाने से शुरू हुआ. बेंगलुरु स्थित इस्कॉन मंदिर के अध्यक्ष पद्मश्री मधु पंडित दास ने देखा कि कुछ बच्चे रोजाना मंदिर में आते हैं और खाना खाते हैं. पूछा तो बच्चों ने बताया कि हम स्कूल में पढ़ते हैं. परिवार गरीब है. भरपेट भोजन यहीं मिलता है. इसके बाद अक्षय पात्र फाउंडेशन शुरू हुआ. आज यह विश्व का सबसे बड़ा (गैर लाभकारी) मिड डे मील कार्यक्रम है. 12 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों के 19,039 स्कूलों के 18 लाख बच्चों को रोजाना भोजन उपलब्ध करवाता है. इसका नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज है और यह मानता है कि भूख के कारण कोई बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहना चाहिए.

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अगर आपको नही पता तो बता दे कि कोविड संकट के दौरान लॉकडाउन और काम न मिलने से बहुत से लोगों को भूखा सोना पड़ता है. ऐसे कई लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट आया तो अक्षय पात्र ने मदद का हाथ बढ़ाया. 13 मई तक अक्षय पात्र की ओर से 4 करोड़ 84 लाख लोगों को भोजन परोसा गया. इसमें अकेले अक्षय पात्र ने 4 करोड़ 14 लाख लोगों को और सहयोगी संगठनों ने 69 लाख लोगों को भोजन कराया. यह संख्या लगातार बढ़ रही है.

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