यौन शोषण पीड़िताओं की सहायता के लिए एम्स शुरू करेगा ये सुविधा

नई दिल्ली: अखिल इंडियन आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) एक ऐसी सुविधा शुरू करने जा रहा है जिससे कि यौन शोषण पीड़िताओं को सहायता मिल सके. इसके लिए उन्हें एक ही छत के नीचे सभी तरह के उपचार, परीक्षण व देखरेख मिलेगी. जिसमें शारीरिक प्रशिक्षण, चोट, फोरेंसिक टेस्ट, डीएनए प्रोफिलिंग, साइकोलॉजिकल (मनोवैज्ञानिक) व साइकेट्रिक (मानसिक रोग) जैसी सुविधाएं भी शामिल है.

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राष्ट्रीय वन-स्टॉप यौन उत्पीड़न इम्तिहान के प्रस्ताव को एम्स ने केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के पास अनुमति के लिए पहुँचाया है . अब केंद्रीय सेहत व परिवार कल्याण मंत्रालय इस पर मंथन कर रहा है . 2016 के राष्ट्रीय क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में हर दिन छह दुष्कर्म व कई यौन शोषण के मामले सामने आते हैं .

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एम्स के फोरेंसिक मेडिसिन के विभागाध्यक्ष चिकित्सक सुधीर गुप्ता ने बताया है कि, 'महिलाओं को शारीरिक प्रशिक्षण, साइकेट्रिस्ट व काउंसिलिंग की जरूरत होती है  'उन्होंने कहा है कि नया केंद्र उन महिलाओं पर कुछ बोझ को कम करेगा जो जघन्य अपराधों का शिकार हुई हैं . शुरुआती पांच सालों में इस केंद्र की स्थापना व परिचालन पर 40 करोड़ रुपये की लागत आएगी . जिसमें 10 चिकित्सक, डीएनए लैब के दो वैज्ञानिक, छह टेक्नीशियन, आठ महिला नर्स व दो डाटा एंट्री ऑपरेटर शामिल होंगे .

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