आगामी वर्ष सं. 2075 में ज्येष्ठ अधिक मास की प्राप्ति

May 20 2017 04:30 AM
आगामी वर्ष सं. 2075 में ज्येष्ठ अधिक मास की प्राप्ति

उज्जैन। असंक्रान्तिमासोधिमास: स्फूर्टस्यात् के अनुसार आगामी वर्ष सं. 2075 वि. में ज्येष्ठ मास अधिक मास के रूप में प्राप्त हो रहा है। सूर्य-चन्द्र के भ्रमण से ३ वर्ष के अंतर पर अधिक मास की स्थिति बनती है। जिस किसी मास में सूर्य की संक्रांति नहीं आती है वह अधिक मास पुरुषोत्तम मास के नाम से जाना जाता है।

व्यतीत समय में वि.सं. 1999, 2018, 2037 व 2056 संवत् के पश्चात् पुन: महान पुण्यप्रद ज्येष्ठ अधिक मास वि.सं. 2057 सन् 2018 में प्राप्त हो रहा है। प्र. ज्येष्ठ शुक्ल 1 बुधवार ता. 16 मई 2018 से द्वि. ज्येष्ठ कृष्ण 30 बुधवार ता. 13 जून 2018 तक रहेगा। ज्येष्ठ अधिक मास के लिए लिखा है 'ज्येष्ठद्वये नृपध्वंसो धान्यानि शितिसत्तये धान्य का अधिक उत्पादन और सत्ता पुरुषों का नाश होता है। अधिक मास में उज्जैन में पुराणोक्त सप्तसागरों (रुद्र, क्षीर, पुष्कर, गोवर्धन, विष्णु, रत्नाकर व पुरुषोत्तम सागर) की यात्रा, स्नान व सागरों के निर्धारित दान करने का विधान है। सम्पूर्ण मास धार्मिक कथा-पुराण, पुरुषोत्तम मास की कथा, श्रीमद् भागवत कथा, अवन्ति महात्म्य आदि कथाओं का श्रवण, भजन-कीर्तन, व्रतादि करना चाहिए।

ज्येष्ठ मास अधिक मास होने पर गंगा दशमी का उत्सव पर्व धिक मास में ही मनाने की शास्त्राज्ञा है, शुद्ध मास में नहीं? लिखा है, 'ज्येष्ठमलमासेसति तत्रैव दशहरा कार्यानतु शुद्धे तदनुसार गंगा दशहरा उत्सव ज्येष्ठ अधिक मास में ता. 24 मई 2018 गुरुवार को शास्त्र सम्मत रहेगा। कुछ लोग अमवश शुद्ध मास में करते हैं, जो गलत है। भगवान श्री हरि को अधिक मास के कारण 1 मास अधिक जागना पड़ेगा। देवशयनी एकादशी आषाढ़ कृष्ण 11 सोमवार 9 जुलाई को प्राप्त होगी।

जो धारण किया जाये वह धर्म

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