'वर्ल्ड रिकॉर्ड' बनाएगी अरुणाचल प्रदेश की ये नई सुरंग, जानिए इसमें क्या है ख़ास

ईटानगर: केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को अरुणाचल प्रदेश में 12 किलोमीटर लंबी सेला सुरंग के अंतिम चरण के काम की वर्चुअली शुरुआत की. रक्षा मंत्री ने दिल्ली में राष्ट्रीय युद्ध स्मारक से बटन दबाया और सुरंग में धमाके के साथ ही परियोजना के अंतिम चरण का काम आरंभ हो गया. सेला सुरंग का निर्माण कार्य जून 2022 तक पूरा होने की संभावना है.

यह सुरंग सेला दर्रे से होकर गुजरती है और उम्मीद है कि इस प्रोजेक्ट के पूरा होने पर तवांग के माध्यम से चीन बॉर्डर तक की दूरी 10 किमी कम हो जाएगी. सुरंग से असम के तेजपुर और अरुणाचल प्रदेश के तवांग में स्थित सेना के 4 कोर मुख्यालयों के बीच यात्रा के वक़्त में कम से कम एक घंटे की कमी आएगी. यही कारण है कि इसे रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. सीमा सड़क संगठन (BRO) के माध्यम से बनाई जा रही सेला सुरंग पूरी होने पर 13,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर विश्व की सबसे लंबी दो लेन वाली सड़क सुरंग होगी. इसका निर्माण न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (NATM) का उपयोग करके किया जा रहा है. यह स्नो लाइन से बहुत नीचे है, जो इसे सभी मौसमों के दौरान सुलभ बनाता है.

सुरंग का निर्माण 01 अप्रैल, 2019 को आरंभ हुआ था, जिसमें पहला धमाका 31 अक्टूबर, 2019 को हुआ था. COVID-19 प्रतिबंधों और प्रतिकूल मौसम की स्थिति के बाद भी परियोजना निर्धारित वक़्त से तेजी से चल रही है. इसके जून-अगस्त 2022 तक खत्म होने की संभावना है. सुरंग तवांग की पर्यटन क्षमता में वृद्धि करेगी और ज्यादा पर्यटकों को आकर्षित करेगी. सुरंग के कारण यह उत्तर पूर्व क्षेत्र में एक अधिक लोकप्रिय गंतव्य बन जाएगा. इससे न सिर्फ सुरक्षा बल्कि क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास में भी योगदान मिलने की संभावना है.

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