Share:
दुनिया को विनाश की और ले जा रही ये चीजें.....
दुनिया को विनाश की और ले जा रही ये चीजें.....

प्रदूषण: एक ऐसा चिंताजनक विषय- जो की मनुष्य के वातावरण में नुकसानदेह, जीवन नाशक, विषैले पदार्थों को इकट्ठा करने का काम कर रहा है. हर दिन बढ़ते जा रहे प्रदूषण की वजह से दुनियाभर में जहरीले पदार्थ की मात्रा में बहुत ही तेजी से बढ़ोतरी हो रही है. लेकिन इस बढ़ते प्रदूषण को कम करने के बजाए लोग इसको बढ़ाने में अहम् भूमिका भी निभा रहे है. स्वच्छ भारत अभियान के दौर में भी प्रदूषण में कोई भी कमी देखने के लिए नहीं मिली है. दौर बदल रहा है, चीजें बदल रही है, यहाँ तक कि लोगों के व्यवसाय भी बदल रहे है. लेकिन इस बदलाव के जमाने में भी प्रदूषण में बढ़ोतरी तो और भी तेजी से होती जा रही है. इतना ही नहीं हर दिन बढ़ता जा रहा प्रदूषण का स्तर और भी डरावना होता जा रहा है. दुनिया में कोई भी देश ऐसा नहीं है जहां प्रदूषण की मार न हो. और इस प्रदूषण का बढ़ने का अहम् कारण कारखाओं के विकसित होना, तेजी से बढ़ रहे मोटर कंपनियों के आंकड़े, वाहनों से निकलने वाले धुंए.... तेजी से काटे जा रहे है, पेड़, जंगलों का विनाश, पहाड़ों को खत्म करके कंपनी और फैक्ट्री का निर्माण भी किया जाने लगा है. ये बात इतने में आकर खत्म नहीं होती,  लेकिन इन सब बातों के बीच एक और प्रश्न ऐसा भी जो हर दिन उठाया जाता है कि आखिर इस प्रदूषण से कैसे निपटा जाए. साथ ही साथ  इस बढ़ते जा रहे प्रदूषण  के कई और भी कारण है, जिनके बारें में आज हम आपको बताने जा रहे है, तो चलिए आज इन कारणों को विस्तार से जानते है.....

वायु प्रदूषण:- प्रदूषण की श्रेणी में वायु प्रदूषण सबसे ऊपर है, वर्षों से दुनियाभर के कई हिस्सों में आज भी वायु प्रदूषण एक बड़ी परेशानी है, जो कि सच में चिंता का विषय भी है. जी हां वायु प्रदूषण दुनियाभर में हर दिन हो रहे परिवर्तन के कारण से बढ़ रहा है, इस परिवर्तन में रोजाना वायु की गुणवत्ता में तेजी से गिरावट देखने के लिए मिल रही है. लेकिन लोग अब भी यही प्रश्न कर रहे है कि रोजाना वायु प्रदूषण कैसे बढ़ रहा है.... तो हम बता दें कि इस विकास के दौर में भी कई वस्तुएं ऐसी है जिसका इस्तेमाल करना बहुत ही हानिकारक है. जैसे की बड़े बड़े कारखानों में अब भी चिमनियों का इस्तेमाल होना, चिमनियों से निकलने वाला धुंआ वायु को तेजी से प्रदूषित करता है, और उसकी गुणवत्ता को भी कम करता है. ईंधन से निकलने वाला धुंआ भी इसका अहम् कारण है. जी हां भारत के कई हिस्सों में आज भी घरों में लकड़ियों और बरुदे का ही इस्तेमाल किया जाता है, जिससे निकलने वाला धुंआ भी इसकी वजह है. खेतों में फसल पकने के बाद उसकी परली को जलाने से होने वाला धुंआ भी वायु प्रदूषण में अपनी भूमिका को अदा कर रहा है. लेकिन सवाल यह भी है कि...? इस प्रदूषण को कम कैसे किया जाए... तो अब तक इस प्रश्न का कोई भी पुख्ता जवाब हाथ नहीं आया है, हर तरफ बस यही बातें की जाती है कि यदि फैक्ट्रियों में इस्तेमाल होने वाली चिमनियों को बदलकर हाई टेक वास्तु का इस्तेमाल किया जाए तो शायद इसमें कुछ कमी आ सकती है... वहीं देशभर के छोटे छोटे गांव के घरों में यदि CNG या LPG का इस्तेमाल किया जाने लगे तो इस प्रदूषण से काफी हद तक निजात भी मिल सकता है.

जल प्रदूषण:- जल प्रदूषण क्या है....? किस वजह से प्रदूषित होता है जल....? जल स्तर कम होने का अहम् कारण क्या है ....? जल प्रदूषण को किस तरह से किया जा सकता है कम...? और भी इसी तरह के कई प्रश्न है...? जिनका जवाब मिल पाना थोड़ा कठिन है लेकिन नामुमकिन नहीं. जी हां दुनिया भर में हर दिन कम होता जा रहा जल स्तर वास्तव में बहुत बड़ा चिंता का विषय बन चुका है, आज भी कई राज्य ऐसे है जहां जल पूर्ति नहीं हो पा रही है. गर्मियों के समय में यह परेशानी और भी ज्यादा बढ़ जाती है.  इतना ही नहीं कई स्थान तो ऐसे भी है जहां की नदियाँ बहुत ही ज्यादा प्रदूषित है, नालों, और ड्रेनज पाइप लाइन सभी चीजों का निकास एक ही नदी में दिया गया है. इस वजह से हर दिन नदियां प्रदूषित हो रही है, लोग इतने लापरवाह है कि नालों से लेकर नदियों तक में घरों से निकलने वाला कूड़ा- प्लास्टिक के बैग, अपशिष्ट पदार्थ आदि डाल कर चले जाते है, जिसकी वजह से नदियों के पानी की गुणवत्ता और भी ज्यादा ख़राब हो रही है. इतना ही नही इस ख़राब गुणवत्ता की वजह से वैक्टीरिया के कई तरह के विषाणु भी तेजी से पनपने लग जाते है. काई छोटे-छोटे गांव में इसी दूषित पानी का सेवन करने से कई खतरनाक और जानलेवा बिमारी भी तेजी से जन्म लेने लग जाती है. दूषित जल का सेवन यदि निरंतर किया जाए तो इससे जान भी जाने का खतरा बढ़ जाता है. लेकिन लोगों को इस बात की जरा भी फ़िक्र नहीं है.... उन्हें घर साफ़ करना है... लेकिन घरों का कचरा...और प्लास्टिक बैग का इस्तेमाल करके नदी नालों में ही फेंकना है....? लेकिन उन नदियों और नालों को साफ़ नहीं रखना है, फिर प्रश्न करते है कि कैसे कम किया जाए जल प्रदूषण, किस तरह से बढ़ेगा जल स्तर...? आदि. यदि थोड़ी सी समझदारी दिखाई जाए तो लगातार तेजी से बढ़ रहा जल प्रदूषण और उससे होने वाली बीमारियों एवं जल स्तर को बढ़ाने में सहायता भी कर सकते है. इसके साथ साथ और भी लोगों को नदी, नालों को साफ़ रखने के लिए अपील भी की जाए तो शायद इस पर काफी हद तक सफलता भी हासिल की जा सकती है.

तेजी से काटे जा रहे जंगल...प्रदूषण का अहम् कारण:- दुनिया भर में इस बात से कोई भी अनजान नहीं है कि लगातार इंसान खुद के विकास के लिए किस तरह से जंगलों की कटाई करने में लगे हुए है. कोई इन लोगों को ये बताए कि.... यदि जंगलों को काट दिया तो भारी मात्रा में ऑक्सीजन की भारी परेशानी का सामना करना पड़ जाएगा.. आज के समय में तेजी से विकसित हो रही, बिल्डिंग, फैक्ट्री, गोदाम, शो-रूम, मॉल की वजह से भी जंगलों और पेड़ों की भारी मात्रा में कटाई की जा रही है. जो की बढ़ते जा रहे है प्रदूषण की एक और मुख्य वजह भी बन रहा है. क्या आप जानते है कि हर वर्ष, हर माह और हर दिन कितने पेड़ों को काट दिया जाता है, नहीं न...... अब प्रश्न यह भी उठाया जाएगा कि लगातार कटते जा रहे है जंगलों को काटने से कैसे बचाया जाए. जिससे मानवीय जीवन को नष्ट होने से बचाया जा सकता है. यदि दुनिया भर के हर देश में रहने वाला व्यक्ति रोजाना एक पौधा भी लगाए और उसकी निरंतर देखभाल करे तो शायद जंगलों को नष्ट होने से बचाया जा सकता है.

प्लास्टिक बैग-बॉटल आदि का इस्तेमाल:- जरुरत एक ऐसा शब्द जिसका मतलब आज के समय के हर किसी को भलीभांति पता होगा....और इस बात का मतलब पता भी होना जरुरी है. लेकिन आज के समय में इंसान अपनी जरुरत की पूर्ति करने के लिए भरी मात्रा में कई ऐसी वस्तुओं का इस्तेमाल करता है जिसकी वजह से प्रदूषण का बढ़ाना स्वाभाविक है, और इस बढ़ती जरूरत को पूरा करने में पॉलीथिन, पस्टिक की बॉटल जैसी और भी कई वस्तुएं.... इसमें अपनी अहम् भूमिका निभा रही है. इंसान अपनी जरुरत को पूरा करने के लिए इन वस्तुओं का इस्तेमाल हतो कर लेता है, लेकिन वह इस बात को भूल जाता है कि इससे पर्यावरण को कितना बड़ा नुकसान पहुंच रहा है. खुद के स्वार्थ में अंधा होता चला जा रहा इंसान इस बात से बिलकुल अनजान है कि इन वस्तुओं के निरंतर इस्तेमाल से हर दिन प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिसकी वजह से लोगों कई तरह की परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है. यदि हम सभी चाहते है कि प्रदूषण का स्तर कम हो तो हमे इन सभी वस्तुएं के इस्तेमाल को रोकना होगा, तब ही हम इस पर काबू पा सकते है.

बढ़ता प्रदूषण और घटता ऑक्सीजन का स्तर:- हमेशा ही एक प्रश्न सामने आता है कि ऑक्सीजन का स्तर दिन व दिन कम क्यों होता जा रहा है....? अब कई लोग इस बारें में जानते होंगे की इसके पीछे कि क्या वजह, और कई लोग तो इस बात से पूरी तरह से अनजान होंगे की आखिर ऑक्सीजन का स्तर किस तरह से कम होता है....? तो हम बता दें कि ऑक्सीजन का स्तर कई कारणों से कम हो रहा है, जिसमे से कुछ कारण इसमें प्रमुख है. जैसे की वाहनों से निकलने वाला धुंआ, खुद के विकास के लिए पेड़-पौधों की कटाई, भारी मात्रा में जंगलों की हरियाली को नष्ट करना भी इस लिस्ट में शामिल हो चुका है. कुछ समय पहले ही अमेज़न के जंगल में आग लगने की खबर सामने आई थी, जिसके बाद केलिफोर्निया के जंगल में आग लगने की वजह से न सिर्फ पेड़ पौधे जले बल्कि भारी मात्रा में जानवरों की जान भी गई. वहीं कुछ समय से ख़बरें है कि भारत में स्थित बक्सवाहा जंगल को नष्ट करने की योजना बनाई जा रही है. बड़े पैमाने पर फैक्ट्री और मॉल के साथ बिल्डिंग का निर्माण किया जाने वाला है. लेकिन इस बात का किसी को भी अंदाजा नहीं है कि यदि इसी तरह से जंगलों और पेड़ों-पौधों को नष्ट किया जाएगा तो वह दिन दूर नही है जब देश के हर कोने में लोग ऑक्सीजन की कमी से कई गंभी बीमारी के साथ साथ मौत का भी शिकार होने लग जाएंगे. वहीं एक बार फिर मौतों का आंकड़ा और भी तेजी से बढ़ेगा, जिसके शायद किसी भी तरह से रोका नहीं जा सकता.

बढ़ता प्रदूषण बन रहा कई बीमारियों का कारण: बीमारी शब्द सुनने में भले ही छोटा लग रहा हो लेकिन इस शब्द का शिकार होने वाले कई लोगों ने अपनी जिंदगी से हाथ धो दिया है. जी हां बीमारी एक ऐसी चीज है जो किसी भी उम्र में किसी को भी अपना शिकार बना लेती है. इतना ही नहीं बीमारियों को तेजी से बढ़ाने में लगातार बढ़ रहे प्रदूषण का सबसे बढ़ा हाथ है. अब आप सोच रहे होंगे कैसे....तो हम बता दें कि दुनियाभर के न सिर्फ छोटे हिस्सों में बल्कि कई बड़े पैमाने में भी बढ़ रहे प्रदूषण ने लोगों की जान को जोखिम में डाला है, इस बात में कोई भी शक नहीं है कि आज के समय में होने वाली बीमारियों में प्रदूषण का कोई भी हाथ नहीं है. और इस बात का साफ़ उदाहरण सर्दियों के समय दिल्ली समेत कई हिस्सों में देखने के लिए मिलता है. इतना ही नहीं  प्रदूषण की वजह से कई बड़ी बीमारी जैसे कि- हैजा, अस्थमा, कोरोना वायरस, ब्लैक फंगस, डेल्टा वेरिएंट जैसी कई जानलेवा बिमारी भी तेजी से विकसित हो रही है. बीते कुछ वर्षों में कोरोना वायरस के कारण लाखों- करोड़ों की तादाद में लोग संक्रमण और मौत का शिकार भी हुए है. इन सब के पीछे तेजी से घट रही एयर क्वालिटी है. 

जंगल बचाओ... प्रदूषण घटाओ: यदि आप भी इस बढ़ते प्रदूषण की मार से बचना चाहते है तो इस बात को ध्यान में रखें की, दुनियाभर में तेजी से घट रही जंगल और पेड़- पौधों की तादाद को अब और भी घटने न दिया जाए. यदि एक बार ऐसा कर लिया गया तो, आप प्रदूषण को कम करने में कामयाब हो जाएंगे. हर दिन... दुनिया भर में लोग इस बात की जागरूकता फैलाएं कि ज्यादा से ज्यादा पेड़ों की कटाई करने से अच्छा है कि उनका रोपण किया जाए, जिससे प्रदूषण के स्टार में गिरावट और मानवीय जीवन सुरक्षित होगा. साफ़ तौर पर कहा जाए कि जितना ज्यादा पेड़ों और पौधों का रोपण होगा तो ऑक्सीजन का स्तर और भी अच्छा होगा. 

नोट:- पर्यावरण यदि सुरक्षित रहेगा तो हम भी सुरक्षित रहेंगे, यदि हम पर्यावरण को इसी तरह से हानि पहुंचाते रहे तो... वो दिन भी दूर नहीं है जब मानवीय जीवन पूरी तरह से नष्ट हो जाएगा. बढ़ता हुआ प्रदूषण हम सभी के सर्वनाश का कारण बनेगा. यदि हम सभी यह चाहते है कि इस प्रदूषण से हमे कोई भी हानि न हो तो इसका केवल एक ही रास्ता है, और वह यह कि प्रदूषण को बढ़ने से रोका जाए, एवं इस काम के लिए ज्यादा से ज्यादा लोगों को हर दिन प्रेरित किया जाए. तब ही इस गंभीर समस्या से निपटा जा सकता है. 

सरकार नागरिकों के सर्वोत्तम हित में तेल की कीमतों पर निर्णय लेगी: पुरी

प्रधानमंत्री ने लोगो की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए नए विचारों को व्यक्त करने का आग्रह किया

कोरोना को लेकर विशेषज्ञों का दावा, कहा- "नहीं आएगी कोविड की चौथी लहर..."

रिलेटेड टॉपिक्स
- Sponsored Advert -
मध्य प्रदेश जनसम्पर्क न्यूज़ फीड  

हिंदी न्यूज़ -  https://mpinfo.org/RSSFeed/RSSFeed_News.xml  

इंग्लिश न्यूज़ -  https://mpinfo.org/RSSFeed/RSSFeed_EngNews.xml

फोटो -  https://mpinfo.org/RSSFeed/RSSFeed_Photo.xml

- Sponsored Advert -