लोकसभा चुनाव: पहली बार तमिलनाडु में करुणाननिधि और अम्मा के बगैर होगी सियासी जंग

लोकसभा चुनाव: पहली बार तमिलनाडु में करुणाननिधि और अम्मा के बगैर होगी सियासी जंग

चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में पहली दफा है कि द्रविड़ आंदोलन के अहम् चेहरे रहे पूर्व सीएम और डीएमके अध्यक्ष एम करुणानिधि और जे जयललिता के बगैर दोनों पार्टियां चुनावी मैदान में उतरी हैं. डेढ़ वर्ष से द्रमुक के कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर एम के स्टालिन की नेतृत्व क्षमता और ताकत की कड़ी परीक्षा हो रही है. किन्तु उनकी असल परीक्षा लोकसभा चुनाव में होना है. वहीं, गुटों में बटी AIADMK सीएम ई पलानीस्वामी और डिप्टी सीएम ओ पनीरसेल्वम के नेतृत्व में चुनावी समर में उतरी है. तमिलनाडु की सभी 39 लोकसभा सीटों पर दूसरे चरण यानी 18 अप्रैल को मतदान होगा.

द्रमुक, कांग्रेस, वामपंथी दलों समेत कई दलों के साथ गठबंधन कर चुनावी मैदान में है तो AIADMK ने भाजपा और डीएमडीके के साथ गठबंधन कर सियासी संग्राम में है. इसके साथ ही अभिनेता से नेता बने कमल हसन की पार्टी अकेले चुनावी समर में है. इस तरह से राज्य की 39 लोकसभा सीटों पर चुनावी मुकाबला बेहद दिलचस्प बन चुका है. तमिलनाडु की सियासत में डीएमके और AIADMK को बने रहने के लिहाज से लोकसभा चुनाव सबसे अहम् है.

स्टालिन की अध्यक्षता में डीएमके एक बार फिर चुनाव में भाग्य आजमा रही है. जबकि इससे पहले द्रमुक 2016 का विधानसभा चुनाव लड़ा और पार्टी को निरंतर दूसरी बार शिकस्त का सामना करना पड़ा. यह पार्टी के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं था, जब द्रमुक सरकार विरोधी लहर के बाद भी सत्ता में वापसी नहीं कर पाई थी.

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