दशहरे पर आखिर क्यों की जाती है शस्त्र की पूजा? जानिए विधि और शुभ मुहूर्त

दशहरा सनातन धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इस दिन कई परंपराएं निभाई जाती हैं जैसे रावण के पुतलों का दहन, शमी पूजा, जवारे विसर्जन तथा शस्त्र पूजा आदि। शस्त्र पूजा विजयादशमी पर निभाई जाने वाली एक अनिवार्य परंपरा है। इस परंपरा का पालन क्षत्रिय परिवारों में व पुलिस एवं सेना विभाग में किया जाता है। यानी जो विभाग एवं समाज अस्त्र-शस्त्र का इस्तेमाल करते हैं, वही ये परंपरा निभाते हैं। आगे जानिए विजयादशमी पर क्यों करते हैं शस्त्र पूजा, विधि और शुभ मुहूर्त…   

ये हैं शस्त्र पूजा के शुभ मुहूर्त (Shastra Puja 2022 Shubh Muhurat):-
पंचांग के मुताबिक, दशमी तिथि 4 अक्टूबर, मंगलवार दोपहर 2.20 से 5 अक्टूबर, बुधवार दोपहर 12 बजे तक रहेगी। श्रवण नक्षत्र विजयादशमी पर पूरे दिन रहेगा। इस दिन के शुभ मुहूर्त इस तरह हैं-
प्रातः 9.30 से दोपहर 12 बजे तक
दोपहर 2 से 2.50 तक
दोपहर 3 से शाम 6 बजे तक

विजयादशमी पर इस विधि से करें शस्त्र पूजा (Shastra Puja Vidhi):-
- विजयादशमी प्रातः स्नान आदि करने के बाद एक जगह पर सभी अस्त्र-शस्त्र किसी कपड़े के ऊपर व्यवस्थित तरीके से जमा दें।
- सबसे पहले शस्त्रों के ऊपर ऊपर जल छिड़क कर पवित्र करें। सभी अस्त्र-शस्त्रों पर मौली (पूजा का धागा) बांधे। 
- तत्पश्चात, महाकाली स्तोत्र का पाठ कर शस्त्रों पर कुंकुम, हल्दी का तिलक लगाकर हार पुष्पों से श्रृंगार कर धूप-दीप कर मीठा भोग लगाएं।
- पूजा करते वक़्त इस मंत्र का का जाप करें- आश्विनस्य सिते पक्षे दशम्यां तारकोदये। स कालो विजयो ज्ञेयः सर्वकार्यार्थसिद्धये॥ 
- आखिर में कुछ देर के लिए शस्त्रों का प्रयोग करें जैसे हवाई फायर। तलवार या अन्य कोई शस्त्र हो तो उसका प्रदर्शन करें। 
- इस प्रकार विजयादशमी पर शस्त्र पूजा करने से शोक और भय का नाश होता है। साथ ही देवी विजया खुश होती हैं।

क्यों की जाती है शस्त्र पूजा?
धर्म ग्रंथों के मुताबिक, जब महिषासुर दैत्य का आतंक बहुत बढ़ गया तो देवताओं ने देवी दुर्गा का आवाहन किया। देवी प्रकट हुई एवं देवताओं ने उन्हें अपने दिव्य अस्त्र-शस्त्र प्रदान किए। इन्हीं शस्त्रों की मदद से देवी ने महिषासुर का वध किया। ये तिथि आश्विन शुक्ल दशमी थी। इस युद्ध में शस्त्रों ने बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जिनके बल पर देवी ने अधर्म पर विजय प्राप्त की। अस्त्रों की अहमियत को समझते हुए ही दशहरे पर शस्त्र पूजा की परंपरा बनाई गई।

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