रमज़ान 2018 : बिना नीयत के रोज़ा अधूरा हैं

रमज़ान 2018 : बिना नीयत के रोज़ा अधूरा हैं
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इस्लाम धर्म का सबसे पवित्र महीना रमज़ान की शुरुआत हो चुकी हैं. रमजानुल मुबारक के रोज़े का इस्लाम धर्म में बहुत ही खास और अलग ही महत्व होता है. लेकिन एक बात जरूर है कि रोज़ा रखने के लिए सबसे पहले नीयत का होना बहुत जरुरी होता है. जी हाँ... यदि आप बिना किसी नीयत के दिनभर बिना कुछ खाये-पिए रोज़ा रख लेते है तो आपका रोज़ा किसी काम का नहीं है. ऐसा त्याग रोज़ा नहीं कहलाएगा. रोज़ा रखने के लिए भी नीयत का होना एक शर्त है.

मदरसा जामिया कासमिया दारुत्तालीम व सना के मोहतमिम मौलाना इब्राहीम कासमी ने मिशकात शरीफ ने बताया कि, दुनिया में कोई भी काम बिना नीयत के नहीं होता है हर काम के लिए नीयत का होना बहुत जरुरी है और सभी काम नीयत पर ही आधारित है. और इसलिए रमज़ान ने भी अगर रोज़े रखना है तो इसके लिए नीयत का होना जरुरी है. रमज़ान में भी जितने रोज़े रखे जाते है उन सभी को रखने के लिए नीयत का अति आवश्यक है. रमज़ान के महीने में जितने भी रोज़े रखे जाते है उन सभी के लिए अलग-अलग नीयत का होना जरुरी होता है. सिर्फ एक ही नीयत सभी रोज़ो के लिए काफी नहीं होती है.

इस दौरान मौलाना इब्राहीम कासमी ने भी बताया कि, रोज़ा रखने के लिए सहरी खाना बहुत जरुरी है. मौलाना साहब आगे कहते है कि, सहरी खाने वालो पर अल्लाह और उनके फ़रिश्ते रहमत नाजिल फरमाते है. अगर सहरी खाने का मन ना हो या फिर भूख ना हो तो भी सुन्नत पर अमल करने के लिए दो छुवारे या सिर्फ पानी का एक घूंट ही पी लेना चाहिए.

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