अगहन अमावस्या आज, जरूर करे ये 3 काम

प्रत्येक अमावस्या की भांति मार्गशीर्ष मास की अमावस्या की भी खास अहमियत है। इसे अगहन अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। शास्त्रों में अमावस्या तिथि को पितरों को समर्पित माना गया है। पितरों से संबंधित किसी भी काम को करने के लिए ये तिथि बहुत शुभ मानी जाती है। साथ ही इस दिन पूजा-पाठ, स्नान, दान आदि की भी खास अहमियत बताई गई है। अगहन अमावस्या 4 दिसंबर को शनिवार के दिन पड़ेगी। धार्मिक मान्यता के मुताबिक, अमावस्या के दिन नदी स्नान, दान आदि से पाप मिटते हैं तथा ऋण से छुटकारा प्राप्त होता है। अमावस्या तिथि 03 दिसंबर 2021 को शाम 04 बजकर 58 मिनट से आरम्भ होगी तथा 04 दिसंबर 2021 को दोपहर 01 बजकर 15 मिनट तक रहेगी। शनिवार के दिन अमावस्या तिथि होने की वजह से इसे शनैश्चरी अमावस्या के नाम से जाना जाएगा। ज्योतिषाचार्य के अनुसार, 4 दिसंबर के दिन तीन कामों को अवश्य करें। इससे आपकी जिंदगी की तमाम दिक्कतों का ​निवारण हो सकता है।

स्नान और नारायण का ध्यान करें:-
अमावस्या पर पवित्र नदियों में स्नान की अहमियत है। मगर यदि आप स्नान के लिए नदी के तट तक नहीं जा सकते हैं तो गंगा जल को किसी बर्तन में डालकर उसमें सामान्य पानी मिलाकर नहाएं। स्नान करने के चलते पवित्र नदियों का मन में स्मरण करें। ऐसा करने से भी तीर्थ स्नान के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। नहाने के पश्चात् श्री हरि की पूजा करनी चाहिए। उनके मंत्रों का जाप करना चाहिए तथा गीता का पाठ करना चाहिए। इससे सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।

पितरों के लिए करें धूप-ध्यान:-
अमावस्या तिथि को पितरों की आत्म तृप्ति के ​लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म भी किए जाते हैं। कुंडली में अगर पितृ दोष के निवारण के लिए भी ये तिथि शुभ मानी जाती है। आप इस अमावस्या की दोपहर लगभग 12 बजे पितरों के लिए धूप-ध्यान करें। इसके लिए गोबर का कंडा जलाएं तथा जब धुआं निकलना बंद हो जाए, तब अंगारों पर गुड़-घी डालकर धूप दें। धूप देते वक़्त पितरों का ध्यान करें। पितरों की मुक्ति के लिए गीता के सातवें अध्याय का पाठ करें तथा जरूरतमंद व्यक्तियों को सामर्थ्य के मुताबिक दान करें।

शनि देव की पूजा करें;-
अमावस्या एवं शनिवार का संयोग होने की वजह से इसे शनैश्चरी अमावस्या कहा जाएगा। इस दिन शनिदेव की खास आराधना करने से शनि साढ़ेसाती तथा ढैय्या के कष्टों से भी छुटकारा पाया जा सकता है। आप अमावस्या के दिन सरसों के तेल का दान करें। ओम् शं शनैश्चराय नम: मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें। पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीया जलाएं। सामर्थ्य के मुताबिक, काले तिल, काली दाल, काले वस्त्र एवं काले कंबल आदि कुछ भी किसी जरूरतमंद को दान करें।

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