बसंत पंचमी पर जो इस तरह करते हैं कामदेव और रति की पूजा, उन्हें मिलता है कामुक जीवनसाथी

Feb 09 2019 06:40 PM
बसंत पंचमी पर जो इस तरह करते हैं कामदेव और रति की पूजा, उन्हें मिलता है कामुक जीवनसाथी

आप सभी जानते ही हैं कि शास्त्रों में ऋतुराज बसंत को सभी ऋतुओं का राजा कहा जाता है. ऐसे में इस मौसम में ऋतु परिवर्तन हर ओर दिखाई देना शुरू हो जाता है. कहते हैं बसंत पंचमी के दिन माता सरस्वती के साथ कामदेव एवं उनकी प्रिया रति की भी पूजा करते हैं. कामदेव व्यक्ति के जीवन में प्रेम का संचार करते हैं वहीं देवी रति शृंगार की देवी मानी जाती है. कहते हैं शास्‍त्रों में कामदेव को प्रेम का देवता एवं ऋतुराज बसंत का मित्र कहा गया है तो जाने कैसे करें बसंत पंचमी के दिन कामदेव एवं रति की पूजा. आप सभी को बता दें कि शास्त्रों में कामदेव का धनुष पीले रंग एवं फूलों से बना हुआ दिखाया जाता है और बसंत ऋतु को प्रेम की ऋतु माना जाता है, इसमें फूलों के बाणों को खाकर दिल प्रेम से सराबोर हो जाता है, इन कारणों से बसंत पंचमी के दिन कामदेव और उनकी पत्‍नी रति की पूजा की जाती है.

कहते हैं बसंत पंचमी में ज्ञान और शिक्षा की देवी मां सरस्वती की विशेष पूजा अर्चना करने के बाद कामदेव एवं रति की पूजा भी करने चाहिए और मां सरस्वती जहां विद्या, कला और बुद्धि प्रदान करती हैं तो कामदेव-रति जीवन में प्रेम और शृंगार का संचार करते है. ज्योतिषों के अनुसार बसंत पंचमी के दिन कामदेव को खुश करने के लिए इस सिद्ध कामदेव मंत्र का 108 बार जप करने से जीवन में बहुत अधिक प्रेम करने वाले जीवन साथी की प्राप्ति होती है, साथ बसंत पंचमी को जो कोई भी कामदेव का पूजन करते हैं उनको सुंदर एवं आकर्षिक शरीर प्राप्ति का वरदान मिलता होता है. ज्योतिष के अनुसार बसंत पचंमी के दिन सूर्योदय होने के बाद कम से कम 108 बार नीचे दिये कामदेव मंत्र का जप पीले रंग के आसन पर बैठकर करना चाहिए. वहीं अगर संभव हो तो इस दिन पीले रंग के धुनष को अपने घर में जरूर लेकर आयें एवं बैठक वाले मुख्य कमरे में हमेशा लगाये रखे, इससे परिवार के सदस्यों में सदैव प्रेम बना रहता है.

कामदेव मंत्र - ऊं नमो भगवते कामदेवाय, यस्य यस्य दृश्यो भवामि, यश्च यश्च मम मुखम पछ्यति तत मोहयतु स्वाहा.

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