आज के दिन ही हिंदुस्तान ने जर्मनी को पछाड़ कर पीला तमगा किया था अपने नाम

देश को आजादी मिलने से 11 साल पूर्व ही 15 अगस्त का दिन ध्यानचंद की प्रतिनिधित्व में इंडियन हॉकी के करिश्मे के दम पर इतिहास में दर्ज हो गया था, जब हिटलर की मौजूदगी में हुए. बर्लिन ओलंपिक फाइनल में हिंदुस्तान ने जर्मनी को पछाड़ कर पीला तमगा अपने नाम किया था. ध्यानचंद के पुत्र एवं 1975 वर्ल्ड कप में हिंदुस्तान की खिताबी सफलता के नायकों में शुमार अशोक कुमार ने कहा, 'उस दिन को वह कभी नहीं भूले एवं जब भी हॉकी की बात होती, तो वह उस वार्षिक ओलंपिक का जिक्र अवश्य करते थे.'

वही समुद्र के मार्ग लंबा सफर तय करके इंडियन हॉकी टीम हंगरी के खिलाफ पहले मैच से दो सप्ताह पूर्व बर्लिन पहुंची थी, किन्तु एक्सरसाइज मैच में जर्मन एकादश से 4-1 से विफल गई. बीते दो बार की चैंपियन हिंदुस्तान ने टूर्नामेंट में लय पकड़ते हुए, सेमीफाइनल में फ्रांस को 10-0 से पराजय किया तथा ध्यानचंद ने चार गोल दागे.

साथ ही वार्षिक में जर्मन डिफेंडरों ने ध्यानचंद को घेरे रखा एवं जर्मन गोलकीपर टिटो वार्नहोल्ज से टकरा कर उनका दांत भी टूट गया. ब्रेक में उन्होंने एवं उनके ब्रदर रूप सिंह ने मैदान में फिसलने के डर से जूते उतार दिये व् नंगे पैर खेले. ध्यानचंद ने 3 एवं रूप सिंह ने दो गोल करके हिंदुस्तान को 8-1 से सफलता दिलाई. अशोक ने बोला ,'उस मैच से पूर्व की रात उन्होंने कमरे में प्लेयर्स को इकट्ठा करके तिरंगे की शपथ दिलाई थी कि हमें हर स्थिति में यह अंतिम मैच जीतना है. उस वक़्त चरखे वाला तिरंगा था, क्योंकि हिंदुस्तान तो ब्रिटिश झंडे तले ही खेल रहा था.' वही उस समय की जीत बेहद ही शानदार थी.

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