संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष बना भारत, जानिए क्या है यह जिम्मेदारी मिलने के मायने

नई दिल्ली: 1 अगस्त को भारत, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) का अध्यक्ष बन गया है। पूरे अगस्त महीने के लिए भारत, सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता करेगा। भारत ने स्पष्ट किया है कि वह UNSC के अध्यक्ष की भूमिका में समुद्री सुरक्षा, शांति प्रक्रिया और आतंकवाद के खिलाफ जंग को प्राथमिकता देगा। भारत के पास UNSC की अध्यक्षता होने की टाइमिंग बेहद अहम मानी जा रही है। दरअसल, अफगानिस्तान से अमेरिकी फ़ौज वपास लौट रही हैं। आतंकी संगठन तालिबान वहां अपनी ताकत बढ़ा रहा है। कश्मीर में धारा-370 को हटाने के 2 साल 5 अगस्त को पूरे हो रहे है। इसी महीने भारत अपना 75वां स्वतंत्रता दिवस भी मनाएगा। ऐसे में सुरक्षा परिषद में भारत की अध्यक्षता पर पूरे विश्व की निगाहें जमी हुईं हैं।  

क्या है UNSC का इतिहास ?

सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद देशों के बीच शांति, सुरक्षा और मैत्रीपूर्ण संबंधों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र (UN) की स्थापना हुई। संयुक्त राष्ट्र के 6 प्रमुख अंग है, जिनमें से UNSC भी एक हिस्सा है। इसका मुख्य कार्य पूरी दुनिया में शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है। UNSC की प्रथम बैठक 17 जनवरी 1946 को हुई थी। गठन के वक़्त सुरक्षा परिषद में 11 सदस्य थे। 1965 में ये तादाद बढ़ाकर 15 कर दी गई। सुरक्षा परिषद के कुल 15 सदस्य देशों में से 5 स्थायी और 10 अस्थायी हैं। स्थायी सदस्यों में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और चीन का नाम है। स्थायी सदस्यों में से अगर कोई भी देश किसी फैसले से असहमत होता है, तो वीटो पॉवर का उपयोग कर उस फैसले को पारित होने से रोक सकता है। इन 5 स्थायी देशों के अतिरिक्त 10 अस्थायी देशों को भी 2 साल के लिए UNSC में शामिल किया जाता है। इनका चयन क्षेत्रीय आधार पर किया जाता है। इन 10 अस्थायी सीटों में से पांच सीटें अफ्रीका और एशियाई देशों के लिए, एक पूर्वी यूरोपीय देशों, दो लैटिन अमेरिकी और कैरिबियाई देशों और दो पश्चिमी यूरोपीय और अन्य देशों को प्रदान की जाती हैं। किसी देश को तभी मेंबर बनाया जाता है जब दो-तिहाई देश उस देश के पक्ष में मतदान करते हैं। भारत जनवरी में 8वीं बार UNSC का अस्थायी सदस्य बना है। गत वर्ष जून में हुई वोटिंग में भारत को 192 में से 184 मत प्राप्त हुए थे। भारत 31 दिसंबर 2022 तक सुरक्षा परिषद का मेंबर रहेगा। बता दें कि UNSC की अध्यक्षता प्रति माह बदलती रहती है। अंग्रेजी शब्दों के क्रोनोलॉजिकल ऑर्डर में प्रति माह सदस्य देश को अध्यक्षता मिलती है। भारत से पहले जुलाई में इसकी अध्यक्षता फ्रांस के पास थी। सितंबर में आयरलैंड को यह जिम्मेदारी दी जाएगी। अपने 2 साल के कार्यकाल में भारत 2 बार UNSC का अध्यक्ष बनेगा। 

भारत के सामने क्या समस्या ?

दरअसल, भारत बहुत समय से UNSC का स्थायी सदस्य बनने की कोशिश कर रहा है, किन्तु भारत की राह में सबसे बड़ा रोड़ा चीन है। चीन के अतिरिक्त फ्रांस, अमेरिका, रूस और ब्रिटेन भारत को UNSC का स्थायी सदस्य बनाने पर अपनी सहमति व्यक्त कर चुके हैं, किन्तु चीन अलग-अलग बहानों से भारत की स्थायी सदस्यता का विरोध करता रहा है। इसके साथ ही कई बार UNSC के स्ट्रक्चर में परिवर्तन की मांगें भी उठती रही हैं। तर्क दिया जाता है कि UNSC में विकासशील देशों का प्रतिनिधित्व कम है, किन्तु स्थायी सदस्य नहीं चाहते कि इसमें किसी तरह का परिवर्तन हो और किसी दूसरी देश को वीटो पॉवर मिले। भारत के अलावा जापान, जर्मनी और ब्राजील भी सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनने की कोशिश में लगे हुए हैं।

UNSC अध्यक्ष बनने के बाद क्या भारत को मिलेगी स्थायी सदस्यता?

सेंटर फॉर पॉलिटिकल स्टडीज, जेएनयू के प्रोफेसर डॉक्टर सुधीर सुथार के अनुसार, भारत के पास सुरक्षा परिषद के नेतृत्व आना एक एडमिनिस्ट्रेटिव मामला है। इसमें कोई कूटनीतिक रणनीति नहीं है। साथ ही हर बैठक का एजेंडा भी पहले से ही तय होता है। इसलिए आपके पास बहुत अधिक कुछ नया करने की संभावना नहीं होती है। संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों में सुरक्षा परिषद को विस्तार देने की मांग बीते कई दशकों से उठ रही है, पर जब तक पांचों स्थायी सदस्य राजी नहीं होते, तब तक किसी भी तरह के बदलाव की संभावना नहीं है।  

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