'गुलाबो-सिताबो' की ऑनलाइन रिलीज पर भड़का आईनॉक्स, निर्देशक ने दिया जवाब

इस समय कोरोना वायरस के चलते पूरे देश में लॉकडाउन लगा हुआ है. कोई नहीं बता सकता है कि हालात कब तक सामान्य होंगे. ऐसे में फिल्म निर्माता अपनी फिल्मों को सीधे ओटीटी प्लेटफार्म पर रिलीज करना शुरू कर रहे हैं. जी हाँ, लेकिन निर्माताओं के इस कदम से सिनेमाघरों के मालिक बहुत नाराज हैं. आप सभी को बता दें कि शूजीत सरकार की फिल्म 'गुलाबो सिताबो' के ओटीटी पर रिलीज होने की घोषणा के बाद मल्टीप्लेक्स आईनॉक्स ने एक प्रेस नोट जारी करके नाराजगी जताई थी जिस पर निर्माता और निर्देशक कुणाल कोहली ने जवाब दिया है. हाल ही में मुझसे दोस्ती करोगे, हम तुम, फना, तेरी मेरी कहानी जैसी फिल्मों का निर्देशन कर चुके कुणाल कोहली ने एक ट्वीट के जरिए आईनॉक्स को जवाब देते हुए लिखा कि, 'Let inox release what % of their revenue is ticket sales vs F&B.F&B is based on ticket sales, no one goes to a theatre to eat,Right? Start sharing that revenue with producers as well, before accusing them for trying to survive in a world pandemic never witnessed before by mankind'

आप सभी को बता दें कि गुलाबो-सिताबो के थिएटर से पहले डिजिटल रिलीज पर नाराजगी जताते हुए आईनॉक्स ने एक लेटर जारी किया था और उस दौरान उसमें बहुत कुछ लिखा था. जी दरअसल उसमे लिखा था, 'आईनॉक्स पिछले कई साल से वर्ल्ड क्लास थिएटर बनाने में अपने पैसे लगा रहा है. इसका मकसद केवल ये है कि लोगों तक अच्छा सिनेमा पहुंचे. इस मुश्किल की घड़ी में ये बेहद दुखद है कि हमारे एक पार्टनर पिछले कई साल से चले इस रिश्ते को नहीं निभा रहे हैं. वह भी तब जब हमें कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहने की जरूरत है. ये अपने आप में ऐसा पहली बार हो रहा है. ये हमारी पार्टनरशिप को तोड़ रहा है. हम और कंटेंट प्रोड्यूसर काफी वक्त से पार्टनर है. हम ये दोहराना चाहते हैं कि इससे रेवेन्यू को काफी झटका लगेगा. हम सभी कंटेंट क्रिएटर से विनती करते हैं कि वह काफी पुराने थिएटर सिस्टम को नहीं छोड़े और डिजिटल प्लेटफॉर्म में फिल्में रिलीज न करें. इसके अलावा वेल्यू चेन में मौजूद सभी लोगों के हितों का ख्याल रखें.'

वहीँ उसके बाद सिनेमाघरों के मालिकों की नाराजगी पर गिल्ड ने कहा है कि, ''उनके लिए यह बात बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि उनके सहयोगियों से उन्हें नाराजगी भरे संदेश मिल रहे हैं.'' इसी के साथ गिल्ड ने अपनी कमियां गिनाते हुए सिनेमाघरों के मालिकों से कहा है कि यह एक ऐसा समय है जब रुकी हुई फिल्म के निर्माता और पूरी हो चुकी फिल्मों के निर्माताओं को प्रतिदिन के हिसाब से करोड़ों रुपये का नुकसान सहन करना पड़ रहा है. लॉकडाउन की वजह से पता नहीं कि फिल्मों की शूटिंग दोबारा कब शुरू होगी? इसी के साथ आगे गिल्ड की तरफ से जारी किए गए एक प्रेस नोट में कहा गया है, 'फिल्मों के लिए किराए पर लिए गए स्टूडियो का भाड़ा और बनाए गए सेट की कीमत निर्माताओं को बिना काम किए चुकानी पड़ रही है. ऐसे समय में बीमा कंपनियां भी साथ देने के लिए तैयार नहीं हैं. यहां तक कि उनका कैंसिलेशन चार्ज भी बहुत महंगा पड़ रहा है. हर एक राज्य सरकार सिनेमाघरों को फिर से खोलने के अपने निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं लेकिन वह भी तभी राहत दे सकेंगे जब कोरोना वायरस पर काबू पाया जाए. किसी भी हिंदी फिल्म को पूरे भारत में रिलीज होने के लिए फिलहाल फिल्म निर्माताओं को इंतजार करना पड़ेगा. मौजूदा स्थिति को देखते हुए लॉकडाउन हटने का कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा है.' 

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