गांधीवादी चिंतक केयूर भूषण का निधन

छत्तीसगढ़ी साहित्यकार केयूर भूषण का गुरुवार को निधन हो गया. केयूर भूषण 90 वर्ष के थे. केयूर भूषण साहित्यकार होने के साथ-साथ स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, राजनेता और पत्रकार भी थे. पृथक छत्तीसगढ़ आंदोंलन में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है. केयूर भूषण पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे आैर उनका इलाज एक निजी अस्पताल में चल रहा था. मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि न केवल छत्तीसगढ़ ने, बल्कि पूरे देश ने एक महान चिंतक को हमेशा के लिए खो दिया है. वे राज्य के सच्चे हितैशी थे.

केयूर भूषण को गांधीवादी चिंतक के रूप में भी पहचाना जाता था. केयूर भूषण 1980 से 1989 तक दो बार रायपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद रहे. केयूर भूषण छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रीय रहे. हालांकि  समाजसेवा में व्यस्त रहने के कारण वो अपनी पढाई मिडिल स्कूल के बाद जारी नहीं रख सके. केयूर भूषण हरिजन सेवक संघ के पदाधिकारी के रूप में भी अपनी सेवा दे चुके हैं. 

साहित्य में केयूर भूषण के योगदान को देखते हुए उन्हें छत्तीसगढ़ी के प्रसिद्ध पं. रविशंकर शुक्ल सदभावना पुरस्कार से 2001 में सम्मानित किया गया. उन्होंने मरजाद, कहां बिलागे मोर धान के कटोरा, लोक-लाज, समें के बलिहारी जैसे चर्चित उपन्यास भी लिखे हैं.  

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