'गेम ऑफ़ अयोध्या' भी बनी विवादों का हिस्सा

Dec 06 2017 08:57 AM
'गेम ऑफ़ अयोध्या' भी बनी विवादों का हिस्सा

देश में बाबरी मस्जिद का विवाद किसी से नहीं छिपा है. राजनेताओ के भाषणों से लेकर डायरेक्टर्स की मूवी तक सबमें बाबरी की उपस्तिथि दर्ज है. बाबरी मस्जिद विवाद को लेकर बॉलीवुड में कई ऐसी फिल्में बनीं है, जोकि काफी विवादित रही है. हाल ही में सुनील सिंह द्वारा निर्देशित फिल्म 'गेम ऑफ अयोध्या' पर काफी बवाल हो रहा है. हिन्दू सम्राट युवा वाहिनी का कहना है कि फिल्म में इतिहास के साथ छेड़छाड़ की गई है. यह फिल्म 8 दिसंबर को रिलीज होना है. यह पहली फिल्म नहीं जो अयोध्या विवाद और दंगों पर बनी है, इससे पहले भी तमाम फिल्मों में बाबरी मस्जिद-अयोध्या विवाद और कई दंगों पर कुछ अंश दर्शाए गए हैं.

बॉम्बे : 1995 में बनीं फिल्म 'बॉम्बे' का निर्देशन मणिरत्नम ने किया है. इस मूवी में मुख्य किरदार अरविंद स्वामी और मनीषा कोइराला ने निभाया है. दिसंबर 1992  से लेकर जनवरी 1993 के बीच उत्तर प्रदेश के अयोध्या में हुए बाबरी मस्जिद को लेकर विवाद पर केंद्रित है. फिल्म दोनों आलोचनात्मक और आर्थिक तौर पर सफल रही. एआर रहमान द्वारा दिया गया संगीत बहुत ही सराहा गया और कई पुरस्कार उन्होंने प्राप्त किए.

नसीम : 1992 की बाबरी मस्जिद घटना के इर्द-गिर्द बनी फिल्म नसीम 1995 को आई थी. इस फिल्म के डायरेक्टर सईद अख्तर मिर्जा थे. फिल्म की कहानी में नसीम नाम की एक युवा लड़की जोकि स्कूल जाती है और अपने दादा के बेहद करीब है. उसके दादा बाबरी मस्जिद के घटना में मौत हो जाती है. इस फिल्म को 1996 में बेस्ट डायरेक्शन और स्क्रीनप्ले के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल चुका है.

ब्लैक फ्राइडे : अनुराग कश्यप के डायरेक्शन में बनी फिल्म 'ब्लैक फ्राइडे' में आतंक का खौफनाक मंजर देखने को मिला था. अनुराग कश्यप की इस फिल्म को कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय अवॉर्ड समारोह में सराहना भी मिली. डायरेक्टर अनुराग कश्यप ने यह फिल्म सिर्फ 70 दिनों में बनकर तैयार हुई थी जिससे ज्यादातर मुंबई और दुबई में शूट किया गया था. फिल्म रिलीज होती उससे पहले ही इस पर बैन लग गया. जिसके 3 साल बाद इस फिल्म के रिलीज होने की अनुमति मिल सकी.

रोड टू संगम : परेश रावल और ओमपुरी के अभिनय से सजी इस फिल्म में गांधीजी के सिद्धांतों और मूल्यों को दिखाने की कोशिश की गई. ‘रोड टू संगम’ की कहानी एक मुस्लिम मैकेनिक हशमत उल्लाह के इर्द-गिर्द घूमती है जिसके पास उस ट्रक का इंजन रिपेयर होने के लिए आता है जिसमें कभी महात्मा गांधी की अस्थियों को इलाहाबाद के संगम पर विसर्जित करने ले जाया गया था. बता दें कि कई अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सवों में ‘रोड टू संगम’ ने अपना जादू बिखेरा था. लॉस एंजेलिस में इसे बेस्ट फ़ॉरेन फिल्म और बेस्ट म्यूजिकल स्कोर का पुरस्कार मिला.

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