Film Review : ऐसी है वेटिंग ?

डायरेक्टर अनु मेनन इस बार एक संवेदनशील कहानी के रूप में फिल्म 'वेटिंग' लेकर आये है जो कि कुछ अलग है.

जानते है फिल्म कि कहानी कि बारे में ?

फिल्म कि कहानी ऐसे दो लोगों पर आधारित है जो एक-दूसरे से एकदम अलग है. दोनों की मुलाकात अस्पताल के वेटिंग रुम में होती है. वहां उनके अपने जीवन और मौत के बीच संघर्षरत हैं. शिव का किरदार नसीरूद्दीन शाह निभा रहे है और पत्नी का किरदार सुहासिनी मणि रत्नम ने निभाया. 7 महीनों से सुहासिनी बीमार हैं जबकि शिव को उम्मीद रहती है कि एक दिन उसकी पत्नी जरूर सामान्य जीवन जी सकेगी. दूसरी तरफ तारा है जिसका किरदार कल्कि ने निभाया है. वो एक नवविवाहित रहती है जिसके पति को एक्सीडेंट के बाद ब्रेन इंज्यूरी हुई है.

स्क्रिप्ट की खासियत ही यह है कि इससे आपको खुशी मिलती है. फिल्म में एक सीन है जब दोनों लोग अपने-अपने अंदाज में अपनी खीझ को एक-दूसरे पर उतारते हैं. यह बिल्कुल वैसा है जैसे कोई भी व्यक्ति परेशान होने पर करता दिखता है. इस सीन को बहदे अच्छे से फिल्माया गया है. इस फिल्म में डायरेक्टर ने मसाला झोंकने कि कोशिश कि है.

डायरेक्शन - हम लोगों में से कई ऐसे होंगे जो इस तरह की कहानियों से दो चार होते होंगे. कभी न कभी हमने अस्पताल के वेटिंग रुम में कुछ पल बिताए होंगे. ऐसे में यहां कहानी में गहराई की कमी कचोटती है. दुर्भाग्य से लेखक और डायरेक्टर इस बात को नहीं संभाल सके.

एक्टिंग -  शिव के किरदार में नसीरुद्दीन ने शानदार काम किया है. आप उन्हें बार-बार देखना चाहते हैं. कल्कि ने भी अभी अभिनय कि बखूबी से निभाया है. मानो यह रोल उन्हीं के लिए लिखा गया था. फिल्म के लिए मेनन को भी क्रेडिट दिए जाने की जरूरत है.

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