घर जाने के​ लिए कराया रजिस्ट्रेशन, फिर भी ट्रेन से जाने का नहीं मिला मौका

फिरोजपुर में एक तरफ कोरोना महामारी, दूसरी तरफ आजीविका की चिंता, तीसरी तरफ जेबें खाली और उसके ऊपर सुरक्षित घर पहुंचने की हड़बड़ी...प्रवासी मजदूर करें तो क्या करें. रजिस्ट्रेशन करवाया, फिर भी ट्रेन से यूपी जाने का मौका नहीं मिला. ऐसे में कई मजदूरों ने मिलकर दो बसें किराये पर लीं और सुल्तानपुर, कानपुर, कुशीनगर के लिए रवाना हुए. एक बस में बैठे 35 मजदूरों में प्रत्येक को दो हजार रुपये किराया देना पड़ा है. कई मजदूरों ने रुपये अपने घर से मंगवाकर बस का किराया दिया है. ये सभी लोग हलवाई, रंगरोगन, मिस्त्री का कार्य करने के अलावा सब्जी की रेहड़ी व अन्य कामकाज करने वाले मजदूर हैं.

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इस मामले को लेकर शैलेंद्र कुमार ने बताया कि वह पिछले कई महीनों से लक्ष्मण हलवाई के पास काम कर रहा था. एक माह की तनख्वाह दी है. उसके बाद कोई पैसा नहीं दिया. फिरोजपुर में अब कामकाज भी नहीं रह गया है, इसीलिए अपने घर जा रहे हैं. उनका मेडिकल हो गया, लेकिन ट्रेन से यूपी नहीं भेज रहे हैं. इसीलिए कई दिनों से एकत्र हो रहे सभी मजदूरों ने दो बसें किराये पर ली हैं. एक मजदूर को दो हजार रुपये किराया देना पड़ा है. एक बस में लगभग 35 मजदूर बैठेंगे.

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आपकी जानकारी के लिए बता दे कि रीतिक यादव और धर्मपाल सिंह वासी यूपी ने बताया कि वे लोग रंग-रोगन का काम करते हैं. कोरोना के चलते अब लोग अपने घरों में रंग-रोगन का कामकाज नहीं करवा रहे हैं. फिरोजपुर में पिछले कई वर्षों से रह रहे हैं, लेकिन अब काम खत्म हो चुका है. कई दिनों से इधर-उधर से मांग कर रोटी खा रहे थे. घर से रुपये मंगवाए, तब जाकर बस का दो हजार रुपये किराया दिया है. वीरवार रात को बस यूपी के लिए रवाना हुई.

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