तिरुमाला मंदिर को लेकर नया विवाद प्रारंभ, जानें क्या है मामला

Jun 07 2020 09:50 AM
तिरुमाला मंदिर को लेकर नया विवाद प्रारंभ, जानें क्या है मामला

लॉकडाउन और कोरोना संक्रमण के बीच आंध्र प्रदेश के तिरुमाला मंदिर की संपत्ति की नीलामी से उठा विवाद पूरी तरह शांत होता, उससे पहले ही एक नया विवाद शुरू हो गया है. वाईएसआर कांग्रेस पार्टी सरकार द्वारा दो मठों की ओर से कब्जा की गई जमीन को नियमित करने के फैसले की श्रद्धालुओं और विपक्षी दलों ने आलोचना की है. वे तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम और राज्य सरकार के फैसले पर सवाल उठा रहे हैं. जिन दो मठों को जमीन दी गई है, उनमें एक मठ के प्रमुख राज्य के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी के करीबी बताए जा रहे हैं.

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आपकी जानकारी के लिए बता दे कि राज्य सरकार ने चार जून को एक आदेश जारी कर मौना स्वामी मठ द्वारा कब्जे में लिए गए 1,870 वर्ग फीट जमीन के प्लॉट को नियमित कर दिया. इसी तरह विशाखा श्री शारदा पीठम को 4,817 वर्ग फीट अतिरिक्त जमीन दे दी गई. दोनों पीठों ने पूर्व में आवंटित जमीन के अतिरिक्त इन प्लॉटों पर कब्जा किया है, जिन्हें राज्य सरकार ने नियमित कर दिया. तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम ने पिछले साल दिसंबर में एक प्रस्ताव पारित कर राज्य सरकार से इन प्लॉटों को नियमित करने का अनुरोध किया था. इसने मौना स्वामी मठ को 374 रुपये प्रति वर्ग फीट और विशाखा श्री शारदा पीठम को 964 रुपये प्रति वर्ग फीट की दर से जमीन लीज पर दी थी.

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इसके अलावा कोरोना वायरस महामारी के कारण 80 दिनों से बंद तिरुमाला मंदिर को 11 जून से श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा. इस दौरान शारीरिक दूरी के दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन किया जाएगा. दर्शन के दौरान श्रद्धालुओं के बीच छह फीट की दूरी और मास्क पहनना अनिवार्य होगा. गृह मंत्रालय ने कंटेनमेंट जोन को छोड़कर देश के बाकी हिस्सों में आठ जून से धर्मस्थलों को खोलने की अनुमति दी है. स्वास्थ्य मंत्रालय की गाइडलाइन में कहा गया है कि गर्भवती महिलाएं, 65 साल से ऊपर के लोग और ऐसे लोग जिन्हें पहले से गंभीर बीमारियां हों, वे ऐसी जगहों जाने से बचें.  

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