अब धरती को हो रहे नुकसान से बचाएगा Sperm, वैज्ञानिकों ने खोजा अनोखा तरीका

नई दिल्ली: पृथ्वी पर ज्यादातर जीवों की उत्पत्ति के लिए दो जैविक वस्तुओं की आवश्यकता होती है. पहला वीर्य यानी स्पर्म (Sperm) और दूसरा अंडा यानी (Eggs). अधिकांश जीव भी इन्हीं दोनों के मिश्रण से उत्पन्न हुए हैं. किन्तु इन्हीं दोनों से पैदा हुए इंसान ने अपनी सुविधा के लिए प्लास्टिक बनाया. जिससे धरती को काफी नुकसान पहुंच रहा है. प्लास्टिक प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ रहा है. अब वैज्ञानिकों ने स्पर्म के माध्यम से पृथ्वी को बचाने का तरीका खोज निकाला है. स्पर्म के माध्यम से वैज्ञानिक धरती से प्लास्टिक का प्रदूषण ख़त्म करने की बात कह रहे हैं. हैरान करने वाली इस खोज में उम्मीद तो है, किन्तु जिस जीव का स्पर्म इस्तेमाल किया जाएगा, उसके विलुप्त होने का खतरा भी पैदा हो सकता है.

चीन के वैज्ञानिकों ने समुद्र और स्वच्छ पानी में मिलने वाली सैल्मन मछली (Salmon Fish) के स्पर्म से एक ऐसी वस्तु तैयार की है, जो प्लास्टिक का विकल्प हो सकती है. ये प्लास्टिक की तरह मजबूत, लचीली तो होती ही है, साथ ही यह बायोडिग्रेडेबल भी है. यानी यह प्लास्टिक की तरह गलने में सैकड़ों वर्षों का समय नहीं लेगी. बल्कि जल्द से गल जाएगी, जिससे पृथ्वी को नुकसान नहीं होगा. इसमें कोई जहरीला केमिकल भी नहीं होता है. चीन के वैज्ञानिकों ने सैल्मन मछली के स्पर्म से DNA के दो स्ट्रेन यानी लड़ियों में सब्जियों के तेल से मिलने वाले एक रसायन को मिलाकर ऐसा पदार्थ तैयार किया है, जो स्पॉन्ज की तरह नर्म, गद्देदार, प्लास्टिक की तरह मजबूत और लचीला है. वैज्ञानिकों ने इसे हाइड्रोजेल (Hydrogel) नाम दिया है. 

सैल्मन मछली के स्पर्म और सब्जियों के तेल से निकले केमिकल से बने इस हाइड्रोजेल (Hydrogel) को किसी भी तरह के आकार में ढाला जा सकता है. यदि इसमें से नमी निकाल दी जाए, तो ये बेहद सख्त और मजबूत पदार्थ बन जाता है. यानी आप इसे किसी भी आकार में ढाल सकते हैं. यानी उसके अंदर से नमी पूरी तरह से निकाल दीजिए. बस आपके लिए किसी भी किस्म के आकार का मजबूत और टिकाऊ ढांचा बन जाएगा. चीन के रिसर्चर्स ने इस हाइड्रोजेल (Hydrogel) से अब तक कप, पजल पीस, DNA का ढांचा तैयार कर लिया है. रिसर्चर्स इसे इको-फ्रेंडली (Eco-Friendly) प्लास्टिक बता रहे हैं. चीन के वैज्ञानिकों ने सैल्मन मछली के DNA से जेनेटिक कोड लेकर हाइड्रोजेल (Hydrogel) तैयार किया है. वर्ष 2015 में आई एक स्टडी के अनुसार, विश्व में इस वक़्त 50 बिलियन टन यानी 50,000,000,000,000 किलोग्राम DNA मौजूद हैं. जिनसे वैज्ञानिक प्लास्टिक का विकल्प तैयार कर सकते हैं. जैसे फसलों से, एल्गी से या फिर किसी बैक्टीरिया के DNA से. इससे लाभ ये होगा कि पृथ्वी पर प्लास्टिक की आवश्यकताओं को पूरा किया जा सकेगा. चाहे वह लचीली थैली हो या फिर सख्त ईंट. आप हाइड्रोजेल जैसे पदार्थों का जैसा चाहे इस्तेमाल कर सकते हैं. 

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