भारत इतिहास के महान कवि कहे जाते है चंदबरदाई

Sep 30 2020 04:04 AM
भारत इतिहास के महान कवि कहे जाते है चंदबरदाई

भारतीय इतिहास के जानकारों में शायद ही कोई ऐसा हो जो चंदरबरदाई को न जानता हो। भारतीय इतिहास के महान कवि कहे जाने वाले चंदरबरदाई का जन्म 1205-1148 ईस्वी में लाहौर में हुआ था। चंदबरदाई भारत के अजमेर-दिल्ली के प्रसिद्ध हिन्दू राजा पृथ्वीराज चौहान के गहरे सखा थे बाद में वे राजा पृथ्वीराज के राजकवि और सहयोगी भी बन गए। वहीं कहा जाए तो चंदरबरदाई का सबसे अधिक समय और जीवन महाराजा पृथ्वीराज चौहान के साथ दिल्ली में ही बीता था।

वहीं जहां तक मानना है, तो पृथ्वीराज चौहान के साथ राजकीय कामों के अलावा वे युद्ध क्षेत्र में भी पृथ्वीराज के साथ ही रहते थे इनका सबसे महत्वपूर्ण काल 13वीं सदी का है। चंदवरदाई का प्रसिद्ध ग्रंथ "पृथ्वीराजरासो" है, इस ग्रंथ की भाषा को शास्त्रियों ने पिंगल कहा है, जो राजस्थान में ब्रजभाषा का पर्याय है। इसलिए चंदवरदाई को ब्रजभाषा हिन्दी का प्रथम महाकवि माना जाता है। 

गौरतलब है कि रासो ग्रंथ की रचना राजा पृथ्वीराज के युद्ध-वर्णन के लिए हुई है। वहीं ग्रंथ में उनके वीरतापूर्ण युद्धों और प्रेम-प्रसंगों के कथन शामिल हैं। इसके अलावा इस ग्रंथ में वीर और श्रृंगार रस का वर्णन बहुत ही सुंदर ढंग से चित्रित किया गया है। यहां बता दें कि चंदबरदाई ने इस ग्रंथ की रचना प्रत्यक्षदर्शी की भांति की है। लेकिन देखा जाए तो शिलालेख प्रमाण से ये स्पष्ट होता है कि इस रचना को पूर्ण करने वाला कोई अज्ञात कवि ही था ,जिसने चंदबरदाई और पृथ्वीराज के अंतिम क्षणों का वर्णन कर इस रचना को पूर्ण किया है। भारतीय इतिहास में चंदबरदाई को हिंदी का पहला कवि और उनकी रचना पृथ्वीराज रासो को हिंदी की पहली रचना होने का सम्मान प्राप्त है, पृथ्वीराज रासो हिंदी का सबसे बड़ा काव्य-ग्रंथ है। इसमें 10,000 से अधिक छंद हैं और तत्कालीन प्रचलित 6 भाषाओं का प्रयोग किया गया है।  

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