क्या है लॉकडाउन के बीच ​निवेशकों के लिए एक्सपर्ट की सलाह ?

विश्व की सबसे धनी कंपनी बर्कशायर हैथवे के संस्थापक-चेयरमैन वारेन बफेट और वाइस चेयरमैन चार्ली मंगर की डायरीज बिल्कुल खाली हैं. दुनिया के और उन्हीं लोगों की तरह, जिनकी डायरीज में कुछ खास नहीं लिखा हुआ है. वाल स्ट्रीट जर्नल को दिए एक इंटरव्यू में 96 वर्षीय मंगर ने हाल ही में कहा कि बर्कशायर हैथवे वर्तमान में किसी भी निवेश के बारे में नहीं सोच रही है. दिलचस्प यह है कि बर्कशायर हैथवे के पास लगभग 12,500 करोड़ डॉलर यानी 10 लाख करोड़ रुपये के आसपास की नकदी है. इतनी नकदी इस वक्त दुनिया की किसी कंपनी के पास नहीं है. ऊपर से, अभी दुनियाभर के जो हालात हैं, उसमें हर तरह की संपत्ति बेहद सस्ते भाव में उपलब्ध है. मंगर दो-टूक कहते हैं कि इस वक्त जो वैश्विक हालात हैं, वो उनकी समझ से बाहर हैं. बल्कि किसी की भी समझ से बाहर हैं. इसलिए इस वक्त कहीं भी निवेश कर देने और बाद में पछताने से बेहतर यह है कि अभी नकदी को कस कर पकड़े रहो और समय को निकल जाने दो. 

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इस मामले को लेकर मंगर कहते हैं, ''अभी जो दिख रहा है वह वाकई कुछ अलग है. हर कोई ऐसे बात कर रहा है जैसे वह भविष्य के बारे में सबकुछ जानता हो. लेकिन हकीकत यह है कि कोई नहीं जानता कि क्या होने वाला है. चार्ली मंगर के मुताबिक यह ऐसा समय है जब आपके पास करने को सिर्फ एक काम है, दूसरा कोई काम नहीं. वह यह कि आप जहां हैं, बिल्कुल वहीं रहें. सबसे अच्छा उपाय यही है कि इस वक्त कोई उपाय ही नहीं करें. अभी तो बस एक ही चीज पूछी जा सकती है कि क्या आपके पास ऐसा कोई सुबूत है कि आप जो कुछ भी करना चाहते हैं, उससे मौजूदा परिस्थितियों में कोई बदलाव आएगा या कि वह और बेहतर होगा?''

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इसके अलावा उनका कहना है कि अगर आपके पास ऐसा कोई सुबूत नहीं, तो आपका कुछ भी करना ठीक नहीं. लेकिन इसकी संभावना कम है कि लोग मौजूदा स्थितियों के मुकाबले किसी बेहतर स्थिति का इंतजार करते दिखेंगे. अभी तो ज्यादा संभावना इसी बात की दिख रही है कि लोग जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया देंगे. स्वाभाविक है कि बहुत से लोगों ने मौजूदा परिस्थितियों का लाभ उठाकर आनन-फानन में कुछ न कुछ अतिरिक्त कमाई की जुगत तलाशी होगी, या तलाश रहे होंगे. अगर आप भी उनमें से एक हैं जो मौजूदा परिस्थितियों का लाभ उठाकर कुछ कमाने के बारे में सोच रहे हैं, तो मैं यही कहूंगा कि अपने लालच के घोड़े को लगाम दीजिए और बफेट व मंगर की राह पर चलिए. इस वक्त लंबी अवधि की तो छोड़ ही दीजिए, मध्यम व निकट अवधि के लिए भी ठोक-बजाकर कुछ कहना मुश्किल है. इसलिए ऐसी कोई कोशिश भी मत कीजिए. जैसा कि ये दोनों बुजुर्ग मानते हैं कि ऐसे लोगों की कोई कमी नहीं है जिन्हें पता कुछ भी नहीं, लेकिन वे ऐसा मोलते हें मानो उन्हें सब पता हो. उनकी मत सुनिए, वे बस बातें हैं. 

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