भारत रत्न, मिसाइलमेन, प्रथम वैज्ञानिक भारतीय राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम

भारत रत्न, मिसाइलमेन, प्रथम वैज्ञानिक भारतीय राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम

15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम में एक मुस्लिम परिवार के वह आम आदमी के सामान ही अंगो व जीवन-चक्र के इंसानी प्रक्रियाओ के तहत जन्म लेने वाले अवुल पाकिर जैनुलब्दीन अब्दुल कलाम सामान्य अंको के सहारे व ग्रेड के पीछे छुपे बिना आज भी अख़बार में मात्र तीन फीसदी से भी कम छपने वाली विज्ञान की खबरों को घर पहुंचाते - पहुंचाते अंको के खेल की जादूगरी से भौतिक शास्त्र में डिग्री का सिक्का ले अंतरिक्ष अभियांत्रिकी में दक्षता के साथ सार्वजानिक जिंदगी शुरू करी थी | मंगल ग्रह के अनुसन्धान व दूसरे देशो के उपग्रह अंतरिक्ष में भेजने वाले गिने - चुने देश में शामिल 21 वी सदी के भारत की लेटलतीफी प्रोजेक्ट वर्क के लिए महशूर डिफेंस रिसर्च एण्ड डवलपमेंट आर्गेनाइजेशन (डी. आर. डी. ओ.) व नये नये वैज्ञानिको व इंजीनियर की कमी व अपने ही कर्मचारियों के विदेश चले जाने की समस्याओ से जूझ रहे इंडियन स्पेस रिसर्च (इसरो) के अन्दर प्रारम्भ में साख निर्माण के समय कार्य किया | इनका कार्य वैज्ञानिक पद व भी प्रबंधक के रूप में था | इसलिए राजनीति के पक्ष - विपक्ष की गणितीय पहलूओ, सरकारी तंत्र के गला देने वाले बाबूगिरी रसायनो व जातिवाद के जैविक सामाजिक जहर के बीच 1974 फिर 1998 में पोकरण में सफलता के साथ काम का लोहा बनवाया व मीडिया के प्रारंभिक दौर व प्राइवेट खबरी चैनलों के अभाव में नील गगन की विशाल व अंतहीन कांटेदार वायरो व दीवारो से न बट सकने वाली सीमाओ के समान सोच व भविस्य की दूरदर्शिता रखने के कारण आसमान में मिसाइलों की जगमगाहट से मिसाइलमैन, भारत रत्न व राष्ट्रपति के पद पर अच्चुक दाव और सफलता का झंडा फहरा के 27 जुलाई 2015 को 12 दिन, 9 महीने 83 वर्ष के जीवन चक्र को पूरा करके जमीनी माटी में मील धार्मिक पांच तत्वों को मुक्त कर शारीरिक मायाजाल से पर राष्ट्र व समाज के लिए बौद्धिक, जीवनशैली व कार्यशैली की छाप समय के चेहरे पर उकेरते हुए भविस्य का नया द्वार खोल गए | कलाम सर उन गिने - चुने चर्चित चेहरे एवं लोकप्रिय चेहरों में से एक थे जिनके दम पर हजारो वर्षो पुराने पुरे मुस्लिम समाज पर आतंकवादी को चस्पा नहीं कर सकते थे | 

यह राष्ट्रीय दृश्टिकोण से ज्यादा सटीक व भविस्य में उज्जवल एवं प्रगतिशील इस्लाम के मार्ग पर चलकर सर्वप्रिय एवं सर्वधर्मो में मान्य एवं उस पथ पर चलने के लिए आत्मा को झंझोर देने वाले थे जो भी दिन में पांच बार नमाज व अन्य सिद्धांतों के अनुपालन के ही प्रारंभिक शिक्षा से आया था | बच्चो से प्रेम व शिक्षा देने की ललक उन्हें जीवन भर युवा बनाये रखे हुई थी क्युकि इस ज्ञान का मर्म होना की जब व्यक्ति पढ़ने जाता है तो व शिक्षक को पढ़ाता है और जब वह शिक्षक बनता है तो खुद शिक्षक बनता है तो खुद पढ़ता है सबके लिए समझ पाना बहुत मुश्किल है | आर्थिक तौर पर उनके पास अन्तिम समय में मामूली सी रकम थी वो भी पहले स्वायत संस्थाओ को दान के लिए अधिकृत कर चुके थे | धन लोलुपता के दौर में अरबो व खरबो बनाने की अन्धी मेराथन दौर में शामिल हुए बिना करोडो लोगो के दिल में जगह बना गये | पैसा सिर्फ जीवन जीने का माध्यम है उसका लक्ष्य नहीं ........... यही बात लोग पूरी जिंदगी खर्च करके भी नहीं सीख पाते है | डॉक्टर अब्दुल कलाम सदैव यह कहते रहे की बड़ा सोचो तो जीवन में कुछ नया कर पाओगे | यहाँ बड़े के दो अर्थ निकलते है पहला सोच को लेकर है इसे हम सामाजिक परिदृश्य के मध्य मापने की स्केल पर दस स्तर पर समझ सकते है | इसके कारण डा कलाम कट्टर इस्लामियों के जाल में न फस पाये और राष्ट्रीयता को जीवन भर सार्थक रखा | दूसरा अर्थ भविस्य के बारे में सबके लिए बेहतर सोचना जो समय के अंतराल एवं दूसरी सारी परिस्थियों को उनके अनुरूप कम एवं ज्यादा तय करके गणना करनी पड़ती है व प्रायोगिक भाषा में राकेट छोड़ने से पहले समय को सेकंडो एवं मिनटों में घटते हुए देखा व समझा जाता है और कार्य को मूर्त रूप दिया जाता है | यह एक विषेश प्रकार का तरीका है जो अविष्कार के बाद उसे जनता तक पहुँचाने को भी सैद्धांतिक एवं विज्ञान के अनुरूप सुनिशित करता है | 

इसी सिद्धांत के आधार पर मैने अपने स्वतः टूटने वाली सिरिंज के अविष्कार (2004) को सरकारी प्रमाणिकता (2006) के प्रमाण-पत्र के पश्यात् उसे जनता तक पहुँचाने का तरीका व लक्ष्य पत्र के माध्यम से उन्हें भेजा | राष्ट्रपति पद की व्यस्ता रहते हुए भी तुरंत स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजकर कार्यवाही करने को कहा और उसकी आधिकारिक रसीद (P1/D-104297, Dated: 07 March, 2007) डाक के माध्यम से घर पहुंचाई | इस तरह प्रमाणित एवं अधिकारिक लिखित कार्यवाही की शुरुवात राष्ट्रपति - भवन में एक ऐतिहासिक एवं बहुत बड़ी उपलब्धि डा कलाम के जीवन में दर्ज है | यह मार्ग आगे "जादू की छड़ी" के पास ले जाता है जो वर्तमान में लोकतंत्र में व्यापत भ्रस्टाचार, कालाधन, बेरोजगारी, गरीबी, लेटलतीफी एवं सारी समस्याओ का एक मात्र उपाय है | इस "जादू की छड़ी" को प्राप्त कर इस्तेमाल करने का तरीका हमने भेजा पर उनका कार्यकाल पूरा होने से वो उन तक पहुंच नहीं पाया | ऐसा ही स्वतः टूटने वाली सिरिंज के अविष्कार के साथ हुआ | स्वास्थ्य मंत्रालय ने जवाब भेजने में वर्षो लगा दिये एवं अब भी राष्ट्रपति - भवन के अधिकारियो की नासमझी से पिछले करीबन तीन वर्षो से अन्तिम निर्णय हेतु लम्बित पड़ा है | 

यह हमारा सौभाग्य रहा की पूर्व के कई पत्रो की बातो का जिक्र उनके राष्ट्रीय सम्बोधनों में मिलता रहा | राजनैतिक दृश्टिकोण से देखे तो बच्चो से प्रेम, शिक्षण की भाषा व 2020 का उद्देस्य, समय की चाल, सामाजिक नैतिक पतन, बढ़ती जनसँख्या में युवाओ की गिनती, जाति के नाम से ही सही बढ़ती एकता एवं संगठन की सोच व खेल के नाम से पैसे के गेम में उनका कार्यकाल पूर्णतया फिट बैठ गया | यदि राजनैतिक चालो, पैसो के प्रति बढ़ती इंसानी तन, मन, परिवार, रिश्तो एवं वर्षो के सामाजिक एवं धार्मिक मूल्यों के समर्पण को देखा जाये तो भविस्य में उनके 2020 के उद्देस्य को टुकड़ो - टुकड़ो में बाट दिया जायेगा | जिस पर अलग अलग सरकारी योजना के झंडा लगा राजनेताओ के चेहरों का मोखोटा पहनकर उसके साथ राष्ट्रीयता का भी चिर हरण कर दिया जायेगा | 

वर्तमान में बुद्विजीवियों एवं मीडिया के हितैषियों ने उन्हें भगवान बना राजनीति का ब्रम्हास्त्र जनता पर छोड़ने से रोक दिया | इससे आगे 20 -20 क्रिकेट को उनका उद्देस्य बता व बार बार प्रत्येक मंच पर 2020 का प्रचार करने का शुरुवाती आधार बता इनके नाम का ट्रॉफी से जोड़कर उसका बेजा इस्तेमाल करने से नहीं चुका जायेगा | आपको यह अर्थहीन, धरतालविहीन, कल्पनीय एवं अप्रासंगिक लग रहा है परन्तु चंद महीनो पूर्व ही जवाबदेही पदासीन लोगो द्वारा "जादू की छड़ी" को सिर्फ बच्चो की कहानियो का पात्र समझ लेना इसकी सच्चाई का सबूत है | विज्ञान की भाषा में "गोल्डफिश" सोने की बनी नहीं होती, "समुद्री - घोडा" धरातल पर नहीं दौड़ता, "मनीप्लांट" पैसे व रुपये नहीं देता इत्यादि - इत्यादि सेकड़ो उदहारण मौजूद है |