अमित शाह बनेंगे बीजेपी के मसीहा?

इस साल के अंत में तीन राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में इस समय बीजेपी की सरकार है, लेकिन इस समय जो रुझान मिल रहे हैं, उससे लगता है कि बीजेपी शायद ही इन राज्यों में सत्ता में वापसी करे। अब ऐसे में बीजेपी अब पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की ओर टकटकी लगाए देख रही है। 
दरअसल, बीजेपी अध्यक्ष चुनावी राजनीति में माहिर माने जाते हैं। इस समय अमित शाह राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश में लगातार चुनाव प्रचार कर रहे हैं। अमित शाह का ज्यादा जोर इन दिनों राजस्थान पर है और वह लगभग हर हफ्ते राजस्थान की यात्रा कर रहे हैं।

दरअसल, राजस्थान में वसुंधरा राजे सरकार की हालत ठीक नहीं है और इस समय बीजेपी का पूरा जोर चुनाव जीतने से ज्यादा राजस्थान में पार्टी को कम से कम नुकसान हो, इस पर है। राजस्थान में हालत यह है कि पार्टी अंदरूनी तौर पर कई खेमों में बंटी हुई है और वसुंधरा राजे के शासनकाल में जिन नेताओं का अपमान हुआ है, वह उसे भूलने को तैयार नहीं है। हालांकि अमित शाह ने  अपने  जयपुर दौरे के दौरान  कार्यकर्ताओं को यह नसीहत दी कि सबको आगामी चुनावों के लिए मैदान तैयार करना होगा  और मिलकर  काम करने से ही सफलता मिलेगी। 

अमित शाह की इस नसीहत के बाद माना जा रहा है कि राजस्थान में बीजेपी के नेता अब एकजुट हो सकते हैं और अपने मतभेदों को भूल पार्टी के लिए काम कर सकते हैं। लेकिन अंदरूनी तौर पर कुछ नेता ऐसे हैं, जो वसुंधरा राजे सरकार में मिले अपमान को नहीं भूल पा रहे हैं। हालांकि मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी बीजेपी की स्थिति बहुत ज्यादा अच्छी नहीं है।  मध्यप्रदेश में जहां शिवराज सिंह चौहान अपनी जन आशीर्वाद यात्रा के जरिए फिर से सत्ता के सिरे तलाश रहे हैं, वहीं कांग्रेस के ज्योतिरादित्य सिंधिया और कमलनाथ के उन पर हमले ताबड़तोड़ जारी हैं। इतना ही नहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी मध्यप्रदेश पर पूरा ध्यान दे रहे हैं और लोकसभा चुनावों के लिए मध्यप्रदेश में जीत को अहम मान रहे हैं। हालांकि राहुल के हर वार को बीजेपी नेता फेल कर रहे हैं। वहीं छत्तीसगढ़ में भी कमोबेश बीजेपी के लिए हालत ऐसी ही है। 

इन सब सियासी पेंचों के बीच अमित शाह की चुनावी रणनीति तैयार है और वह कांग्रेस पर लगातार हमले कर तीनों राज्यों में बीजेपी को मजबूती देने के लिए काम कर रहे हैं। वैसे भी अमित शाह इस समय भारतीय राजनीति में चुनावी रणनीति के बॉस के तौर पर माने जाते हैं। ऐसे में बीजेपी को उम्मीद है कि अगर उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनावी मैदान में उतर जाते हैं, तो उसकी जीत निश्चित हो जाती है।  खैर अमित शाह की यह रणनीति आगामी चुनाव में तीनों राज्यों में बीजेपी के लिए संजीवनी साबित हो पाती है या नहीं यह तो वक्त ही बताएगा। फिर भी जिस तरह से उन्होंने चुनाव की कमान संभाली है, उसे  देखकर तो यही कहा जा सकता है कि वह इन तीनों राज्यों और खासकर राजस्थान को लोकसभा चुनाव 2019 की  जमीन के तौर पर देख रहे हैं, जिसमें वह कोई भी सेंध बर्दाश्त करने को तैयार नहीं हैं। 

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