यहाँ जानिए आमलकी एकादशी के शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Mar 14 2019 04:40 PM
यहाँ जानिए आमलकी एकादशी के शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

आप सभी को बता दें कि इस साल आमलकी एकादशी 2019 को आने में कुछ ही समय बचा है. जी हाँ, क्योंकि इस बार यह 17 मार्च 2019 यानी रविवार को है. आइए आज जानते हैं आमलकी एकादशी 2019 व्रत तिथि व शुभ मुहूर्त और आमलकी एकादशी पूजा विधि.

आमलकी एकादशी 2019 व्रत तिथि व शुभ मुहूर्त -
आमलकी एकादशी - 17 मार्च 2019 (रविवार)
 
एकादशी तिथि प्रारम्भ -   23:33 बजे (16 मार्च 2019)
एकादशी तिथि समाप्त -  20:51 बजे (17 मार्च 2019)
 
पारण का समय (व्रत तोड़ने का समय) - सुबह 6:32 से 8:55 बजे तक (18 मार्च 2019)
द्वादशी समापन समय - शाम 5:43 बजे (18 मार्च 2019)

आमलकी एकादशी पूजा विधि - इसके लिए आमलकी एकादशी व्रत के पहले दिन व्रती को दशमी की रात्रि में एकादशी व्रत के साथ भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए सोना चाहिए तथा आमलकी एकादशी के दिन सुबह स्नान करके भगवान विष्णु की प्रतिमा के समक्ष हाथ में तिल, कुश, मुद्रा और जल लेकर संकल्प करें कि ''मैं भगवान विष्णु की प्रसन्नता एवं मोक्ष की कामना से आमलकी एकादशी का व्रत रखता/रखती हूं. मेरा यह व्रत सफलतापूर्वक पूरा हो इसके लिए श्रीहरि मुझे अपनी शरण में रखें.'' इसके बाद  निम्न मंत्र से संकल्प लेने के पश्चात षोड्षोपचार सहित भगवान की पूजा करें.
 
मंत्र- 'मम कायिकवाचिकमानसिक सांसर्गिकपातकोपपातकदुरित क्षयपूर्वक श्रुतिस्मृतिपुराणोक्त फल प्राप्तयै श्री परमेश्वरप्रीति कामनायै आमलकी एकादशी व्रतमहं करिष्ये' 

अब भगवान की पूजा के पश्चात पूजन सामग्री लेकर आंवले के वृक्ष की पूजा करें और सबसे पहले वृक्ष के चारों की भूमि को साफ करें और उसे गाय के गोबर से पवित्र करें. अब इसके बाद पेड़ की जड़ में एक वेदी बनाकर उस पर कलश स्थापित करें और इस कलश में देवताओं, तीर्थों एवं सागर को आमंत्रित करें. अब कलश में सुगंधी और पंच रत्न रखें. इसके ऊपर पंच पल्लव रखें फिर दीप जलाकर रख दें और कलश पर श्रीखंड चंदन का लेप करें और वस्त्र पहनाएं. इसके बाद कलश के ऊपर श्री विष्णु के छठे अवतार परशुराम की स्वर्ण मूर्ति स्थापित करें और विधिवत रूप से परशुरामजी की पूजा करें. अब रात में भगवत कथा व भजन-कीर्तन करते हुए प्रभु का स्मरण करें और द्वादशी के दिन सुबह ब्राह्मण को भोजन करवा कर दक्षिणा दें साथ ही परशुराम की मूर्तिसहित कलश ब्राह्मण को भेंट करें. अब इन सबके बाद परायण करके अन्न जल ग्रहण करें.

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