आखिर कब लगेगी नोटबंदी की राजनीति पर चुप्पी!

देशभर में नोटबंदी को लेकर ही बात हो रही है। जनता बैंक में पहुंच रही है और अपने बचे नोट जमा कर रही है तो दूसरी ओर कुछ लोग केवायसी स्टेटमेंट पूरा करने में लगे हैं। तो दूसरी ओर नेता हैं कि नोटबंदी पर खींचतान में लगे हैं। नोटबंदी पर सियासत का दौर है और यह मसला शोर शराबे के साथ लगभग हर नेता की जुबान पर चढ़ा हुआ है लेकिन क्या नोटबंदी का विरोध करने वाले इसके लाभ नहीं देख रहे हैं। 40 दिन की दुहाई देने वाले विरोधी 4 मिनट के लिए भी इसके लाभ के बारे में नहीं सोच रहे हैं।

हालात ये हैं कि नोटबंदी पर ही विरोधियों का विरोध टिका हुआ है। चाहे उत्तरप्रदेश हो, गुजरात हो और पंजाब हो विरोधी नोटबंदी पर ही चर्चा कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी नोटबंदी के विरोध की कमेंट ही देखने को मिल रही है। आखिर नोटबंदी पर ही विपक्ष टिका रहा और सरकार की बात तक ध्यान से नहीं सुनी गई। सरकार जिस तरह से कैशलेस इकोनाॅमी को लेकर प्रयास कर रही है हर दिन नियम जारी हो रहे हैं ऐसे में लोगों को कुछ उम्मीद नज़र आ रही है।

बाजार तो धीरे धीरे अपनी तैयारी करने में लगा है। स्थिति यह है कि हर कहीं पेटीएम के टेग लगे हैं और उनका बार कोड दुकानों पर लगा मिल रहा है। इसका उपयोग भी बड़े पैमाने पर लोग कर रहे हैं अब तो छोटे दुकानदार भी टैक्स बचत के कारण कैशलेस इकोनाॅमी को लेकर उत्साहित हैं और अब वे भी कैशलेस ट्रांजिक्शन की तैयारी करने में लगे हैं।

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