जानिए आखिर क्यों विश्वकर्मा जयंती पर की जाती है मशीनों और औजारों की पूजा?

आज यानी शुक्रवार 17 सितंबर को पुरे देश में विश्वकर्मा पूजा का पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन सूर्य कन्या राशि में प्रवेश कर रहा है इसलिए कन्या संक्रांति भी मनाई जाएगी। साथ ही इस बार सवार्थ सिद्धि योग में प्रभु विश्वकर्मा की उपासना का योग बन रहा है। विश्वकर्मा जयंति के साथ इसी दिन वामन जयंति तथा परिवर्तिनी एकादशी भी मनाई जाएगी। 

इस दिन क्यों कि जाती है उद्योगों, फैक्ट्रियों में मशीनों की पूजा?
देवशिल्पी बाबा विश्वकर्मा को विश्व का प्रथम इंजीनियर तथा वास्तुकार के नाम से जाना जाता है। प्रत्येक वर्ष 17 सितम्बर को विश्वकर्मा पूजा के उपलक्ष्य पर उद्योगों, फैक्ट्रियों में मशीनों की पूजा अर्चना की जाती है। विश्वकर्मा पूजन के दिन फैक्ट्रियों, वर्कशॉप, मिस्त्री, शिल्पकार, औद्योगिक घरानों में विश्वकर्मा की उपासना की जाती है।

इस दिन क्यों की जाती है कारखानों में पूजा?
प्रभु विश्वकर्मा को विश्व का प्रथम इंजीनियर भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, भगवान विश्वकर्मा देवताओं के शिल्पकार तथा वास्तुकार थे। इस दिन उद्योग-फैक्ट्रियों की मशीनों सहित सभी प्रकार की मशीनों की पूजा की जाती है। मान्यताओं की मानें तो प्रभु विश्वकर्मा ही ऐसे भगवान हैं, जो प्रत्येक काल में सृजन के देवता रहे हैं। सम्पूर्ण सृष्टि में जो भी चीजें सृजनात्मक हैं, जिनसे जिंदगी संचालित होती है वह सब भगवान विश्कर्मा की देन है। प्रभु विश्कर्मा की पूजा करके उनका आभार व्यक्त किया जाता है।

पूजा का शुभ मुहूर्त:-
17 सितंबर, शुक्रवार को प्रातः 6:07 बजे से 18 सितंबर, शनिवार को 3:36 बजे तक पूजन का समय है।

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