उत्तराखंड की उथल-पुथल से गिरता राजनीती का स्तर

आखिरकार उत्तराखंड में कांग्रेस अपनी सरकार बचाने में कामयाब रही. पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का एक बार फिर मुख्यमंत्री बनना तय हो गया. हालांकि अभी सर्वोच्च न्यायालय द्वारा विधिवत घोषणा होना शेष है. मगर इस घटनाक्रम के साथ जिस तरह के आरोप उत्तराखंड के नेताओं पर लगे हैं. उससे यह बात सामने आती है कि राजनीती में किस तरह से आरोप-प्रत्यारोप लगते हैं इतना ही नहीं जिस तरह से स्टिंग आॅपरेशन की बात कही जा रही है तो एक-एक विधायक की खरीद के प्रयास किस तरह से किए जाते हैं।

हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इस मामले में विधायकों की खरीद हुई है या नहीं लेकिन इससे राजनीति का गिरता स्तर सामने आता है. विधायकों की खरीद के साथ ही भ्रष्टाचार की बातें सामने आती हैं. जहां कांग्रेस पर आरोप लगे हैं वहीं भाजपा पर भी सवाल उठते हैं कि वह राजनीति के इस दौर में है. क्या राजनीति में सत्ता को गिराने के लिए विधायकों को अपने खेमे में लेेने के लिए कुछ भी करना असंगत नहीं है।

जिस तरह से भाजपा विकासीय एजेंडा सामने रख रही है उस आधार पर वह विधायकों को अपने पक्ष में नहीं कर पाई है लेकिन राज्य की राजनीति में विधायकों का दल बदल कानून के दायरे में आना और उन पर तमाम आरोप लगना भारतीय राजनीति के बुरे दौर को दर्शा रहा है।

 

'लव गडकरी'

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