190 साल से रायपुर में होली पर निभाई जा रही है ये अनोखी परंपरा

Mar 05 2020 09:48 AM
190 साल से रायपुर में होली पर निभाई जा रही है ये अनोखी परंपरा

रायपुर: देश के विभिन्न शहरों, गांवों में विविध परंपराओं के मुताबिक होली का पर्व खुशियों और धूमधाम के साथ मनाया जाता है. वहीं, ऐसी ही एक अनूठी परंपरा छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के हृदय स्थल सदर बाजार में देखने को मिलती हैं जहां पर 'सेठ नाथूराम' के बारात निकालने की परम्परा निभाई जाती है. ऐसी परंपरा संपूर्ण छत्तीसगढ़ में कहीं और नहीं निभाई जाती हैं. वहीं, होली के चार दिन पहले सेठ नाथूराम की प्रतिमा को वाहन पर विराजित करके गाजे-बाजे के साथ बारात निकाली जाती है.

इस बारात में युवा, बुजुर्ग राजस्थानी फाग गीत गाते और खुशियों से झूमते हुए सत्ती बाजार से निकलकर सदरबाजार स्थित नाहटा मार्केट पहुंचते हैं. वहीं, यहां पर सेठ नाथूराम की प्रतिमा को विराजित करके पूजा-अर्चना भी की जाती है. यह परम्परा लगातार पांच दिनों तक विधिवत पूजा, आरती करके देर रात तक फाग गीत गाकर खुशियां मनाने का दौर चलता है. बीते 45 सालों से बारात में सम्मलित हो रहे दिलीप शर्मा छापरवाल, ओमप्रकाश शर्मा, झुम्मर शर्मा, रघुनाथ शर्मा, जितेंद्र शर्मा बताते हैं कि बचपन से वे सदरबाजार की अनोखी परंपरा में भाग ले रहे हैं. उन्होंने अपने बुजुर्गों से सुना है कि यह परंपरा 190 वर्षो से अनवरत निभाई जा रही है. 

जहां सेठ नाथूराम की पूजा में पांच पीढ़ी से सेवा कर रहे ओमप्रकाश सेवग बताते हैं कि उनके दादा-परदादा के जमाने से सेवा  चली आ रही हैं. वे स्वयं 45 साल से लगातार बारात में सम्मलित होने से लेकर होली के दिन बिदाई देने तक का लुत्फ उठा रहे हैं. बचपन में दादा ने बताया था कि सेठ नाथूराम को भगवान महादेव का अवतार माना जाता है. राजस्थान के बीकानेर इलाके में उन्हें 'इलोजी" के रूप में पूजा जाता है. कई वर्षो से सेवा दे रहे रघुनाथ शर्मा ने यह जानकारी दी हैं कि होली के पूर्व पड़ने वाली एकादशी तिथि पर सत्तीबाजार से सेठ नाथूराम की बारात निकाली जाती है. कई क्षेत्रों पर बारात का स्वागत ठंडाई, आइस्क्रीम, कुल्फी, नाश्ता से किया जाता है.

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