ये 6 युवा जगा रहे है बच्चों के बीच शिक्षा की अलख

कहते है कि, किसी काम को करने की या सीखने की कोई उम्र नहीं होती है. खासकर शिक्षा में तो उम्र का कोई लेना-देना है ही नहीं. आज बच्चे जिस तरह से पढ़-लिखकर आगे बढ़ रहे है. उससे देश का भविष्य साफ़ देखा जा सकता है. कई बच्चे ऐसे भी है, जो युवा उम्र में मौज-मस्ती करने के बजाए  किसी गरीब के बच्चे की जिन्दगी संवारने में लगे है. ऐसा ही एक 6 दोस्तो का समूह है, जो स्वयं की पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों को भी शिक्षा दे रहा है. इन दोस्तों के नाम क्रमश: सिमरन, मोना हुड्‌डा, सोनिया खन्ना, पूजा राहुल, दीपिका हैं.

छात्रा सिमरन ने कहा कि, दोस्तों को पढ़ाते देख मैने भी बच्चों को पढ़ाना शुरू किया. सिमरन अभी 12वीं क्लास में है. मोना हुड्‌डा ने कहा कि,  वह रोजाना दिल्ली से अप-डाउन करती है और शाम 4 से 6:30 बजे तक कंप्यूटर क्लास लेती है. वही सोनिया पिछले दस वर्षों और पूजा नौ साल से बच्चों को पढ़ा रही है. पढ़ाते हुए ही 9वीं से पोस्ट ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई की है. 

छात्र राहुल ने बताया कि, पिछले पांच साल से बच्चों को पढ़ा रहे हैं. वह प्रतिदिन शाम 5 बजते ही बच्चों को पढ़ाने निकल जाते है.  राहुल मैथ्स पढ़ाने के लिए बड़े बच्चों की स्पेशल संडे क्लास भी लेते हैं. वही छात्र दीपिका का कहना हैं कि, जरूरतमंद बच्चों के लिए कुछ करने की चाह उसमें स्कूल के दौरान से ही थी, लेकिन उस समय कोई रास्ता दिखाने वाला नहीं मिला. कॉलेज में पढ़ाई के पहले साल के दौरान एनएसएस कैंप में शिक्षा के प्रति जागरूकता अभियान चलाया. उस समय मुझे आभास हुआ कि मैं अब कुछ कर सकती हूं. इसके लिए मुझे रास्ता दिखाया प्रिसिंपल वेदप्रकाश श्योराण ने इसके बाद मैंने गांधी स्कूल में जरूरतमंद बच्चों को पढ़ाना शुरू किया. 

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