यहाँ होली का नाम सुनते ही डर जाते हैं लोग, 200 साल से नहीं लगाया रंग

यहाँ होली का नाम सुनते ही डर जाते हैं लोग, 200 साल से नहीं लगाया रंग

दुनियाभर में होली का त्यौहार बहुत ही शानदार तरह से मनाया जाता है. ऐसे में इस दिन होली सभी बहुत उल्लास के साथ खेलते हैं. होली रंगों का त्यौहार है और इस दिन सभी एक दूजे को रंग लगाते हैं. ऐसे में आज हम आपको एक ऐसे गाँव के बारे में बताने जा रहे हैं जहाँ होली खेलते ही नहीं है. जी हाँ, आज हम आपको एक ऐसी जगह के बारे में बताने के लिए तैयार है जहाँ होली का नाम लेना भी पाप माना जाता है और होली खलेना तो दूर की बात होती है. आइए जानते हैं कौन सा है वह गाँव.

जी हम बात कर रहे हैं गुजरात के बनासकांठा जिले की. आप सभी जानते ही हैं कि हमारा भारत देश हर दिन कोई ना कोई त्यौहार मनाया जाता है. बावजूद इसके कुछ ऐसी जगह भी हैं जहां कुछ त्योहारों को नहीं मनाया जाता है. आप सभी जानते ही हैं कि होली का त्यौहार वैसे देश के हर छोटे बड़े शहर, कस्बे और गांव में मनाया जाता है लेकिन गुजरात का एक गांव ऐसा भी है जहां होली का त्योहार नहीं मनाया जाता. आप सभी को बता दें कि इस गांव में होली ना मनाने की परंपरा पिछले 200 साल से चली आ रही है. गुजरात के बनासकांठा जिले में स्थित इस गांव के लोग किसी अनहोनी की वजह से होली का त्योहार नहीं मनाते है. जी हाँ, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि होली का त्योहार ना मनाने के पीछे एक श्राप है जो कुछ ऐसा है.

कहा जाता है यहाँ होली का नाम सुनते ही लोग दुःखी हो जाते हैं और गांव के लोगों के चेहरे पर मातम छा जाता है. कहा जाता है यहाँ रामसन नाम के इस गांव का पौराणिक नाम "रामेश्वर" है और कहा जाता है यहाँ भगवान राम ने भी आकर रामेश्वर भगवान की पूजा की थी. कहते हैं यहाँ 200 साल पहले होलिका दहन किया जा रहा था, लेकिन अचानक ही गांव में आग लग गई और गांव के कई घर इस आग की चपेट में आकर जल गए. आग क्यों लगी इसके पीछे मान्यता यह है कि उस समय के गांव के राजा ने साधू-संतो को अपमानित किया था और क्रोधित साधुओं ने श्राप दिया था की होली के दिन गांव में आग लग जाएगी. जिसके बाद होली मनाना यहाँ बंद कर दिया गया.

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