'इस्लामी कट्टरपंथ के खिलाफ खड़े हों, गीता और कृष्ण को मानने वाले हिन्दू..', जिसने 'हमास' बनाई, उसके बेटे ने ही खोल दी 'आतंकियों' की पोल, Video
'इस्लामी कट्टरपंथ के खिलाफ खड़े हों, गीता और कृष्ण को मानने वाले हिन्दू..', जिसने 'हमास' बनाई, उसके बेटे ने ही खोल दी 'आतंकियों' की पोल, Video
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यरूशलम: इजराइल और फिलिस्तीनी आतंकी संगठन हमास के बीच जारी जंग को लगभग एक महीना होने वाला है। दोनों के बीच कई दिनों से गोलीबारी जारी है, इस जंग में अब लेबनानी आतंकी संगठन हिजबुल्लाह, फिलिस्तीन इस्लामिक जिहाद नामक संगठन भी इजराइल के खिलाफ उतर चुके हैं। वहीं, ईरान और लेबनान की बॉर्डर पर से भी इजराइल पर हमले हो रहे हैं।​ ये पूरा घटनाक्रम तब शुरू हुआ, जब 7 अक्टूबर को हमास ने बिना उकसावे के इजराइल पर जल-थल, आकाश, तीनों मोर्चों से हमला बोल दिया।​ हमास के इस हमले में लगभग 1400 इजराइली मारे गए, आतंकियों ने म्यूजिक फेस्टिवल मना रहे 250 लोगों को गोलियों से भून दिया, बच्चों-महिलाओं का किडनैप कर लिया, महिलाओं को नग्न कर उनकी परेड कराई।​ ​इस हमले के बाद से इजराइल आगबबूला है और उसने हमास को जड़ से ख़त्म करने की कसम खाई है। लेकिन, इस बीच कई लोग फिलिस्तीन के समर्थन में भी उतर आए हैं, यहाँ तक कि, भारत के कुछ मुस्लिम नेता हमास को 'स्वतंत्रता सेनानी' बताकर उसके आतंकी कृत्यों का बचाव कर रहे हैं। इस बीच हमास की स्थापना करने वाले हमास के संस्थापक शेख हसन यूसुफ के बड़े बेटे मोसाब हसन यूसुफ ने हमास की असलियत बताई है, जिसे उन्होंने बेहद करीब से देखा है।

 

फिलिस्तीनी आतंकी संगठन हमास की बुनियाद रखने वाले शेख हसन यूसुफ के सबसे बड़े बेटे मोसाब हसन यूसुफ ने मंगलवार (31 अक्टूबर, 2023) को एक इंटरव्यू में कहा कि अब समय आ गया है कि इस आतंकी संगठन (हमास) के खिलाफ एकजुट होकर खड़ा हुआ जाए। इसके साथ ही हसन यूसुफ ने हमास आतंकियों के खिलाफ आवाज उठाने के लिए भारत की जनता और दुनियाभर में रह रहे हिंदुओं की प्रशंसा की है। बता दें कि, हसन युसूफ ‘सन ऑफ हमास’ नाम से एक किताब भी लिख चुके हैं, जिसमे उन्होंने आतंकियों को लेकर कई हैरान करने वाले खुलासे किए हैं।

हिंसा केवल मुस्लिमों की तरफ से ही क्यों होती है ?

एक इंटरव्यू में 45 वर्षीय मोसाब हसन यूसुफ ने कहा कि ''कट्टर मुस्लिम किसी और समुदाय के साथ नहीं रह सकते हैं और न ही वे ऐसा करना चाहते हैं।'' हसन ने कहा कि, 'हिंदुओं को कोई समस्या नहीं है, ईसाई और यहूदी भी बिना परेशानी के सह-अस्तित्व में रहते हैं। हिंसा सिर्फ कट्टर मुस्लिमों की तरफ से ही क्यों होती है?' 

हमास और इस्लामी आंदोलन को ख़त्म करने की जरुरत :-

हसन युसूफ ने आगे कहा कि, 'मुझे बाकी दुनिया से कोई समस्या नहीं है। भारतीयों को भी किसी से कोई दिक्कत नहीं है। ईसाई, यहूदी, हम सभी सह-अस्तित्व में रहते हैं। लेकिन, हमास और किसी भी अन्य इस्लामी आंदोलन को ख़त्म करने की आवश्यकता है। हमें इसे बेहद खुले तौर पर और स्पष्ट तरीके से कहना होगा। आतंकवाद मंजूर नहीं है।' बता दें कि, फिलिस्तीनी आतंकवादी संगठन हमास से अलग होने के बाद युसूफ इजरायल की सिक्योरिटी एजेंसी शिन बेट के लिए जासूसी का कार्य कर चुके हैं। 2000 की शुरुआत में दूसरे इंतिफादा (विद्रोह) के दौरान आतंकी हमलों को नाकाम करने और शिन बेट की सहायताओं के लिए इजराइल ने उन्हें “ग्रीन प्रिंस” का खिताब भी दिया था।

मैंने हिंसा-रक्तपात का विरोध किया, तो मुझे शैतान घोषित कर दिया :-

उन्हें फिलिस्तीनी आतंकी संगठन हमास के संस्थापक शेख हसन यूसुफ ने छोड़ दिया था। उनके पिता शेख हसन को 60 अन्य हमास नेताओं के साथ गत माह अक्टूबर में वेस्ट बैंक में रेड के दौरान अरेस्ट कर लिया गया था। मोसाब हसन यूसुफ ने बताया कि उन्होंने कट्टर इस्लामी विचारधारा को खारिज कर दिया था और हिंसा को न कहने के लिए उन्हें लगभग-लगभग मौत जैसी प्रताड़ना से गुजरना पड़ा है। उन्होंने बताया कि, 'मेरे देश ने मुझसे किनारा कर लिया। मुझे शैतान घोषित कर दिया गया। ये सब इसलिए हुआ, क्योंकि मैंने हिंसा, रक्तपात और आत्मघाती बम हमलों को नकार दिया। वे हर उस व्यक्ति के साथ यही करते हैं, जो उनके बर्बर तरीके से अलग होता है। मैं दोनों पक्षों को जानता हूँ और इस अधिकार के आधार पर मैं कहता हूँ कि हमें इजरायल के पीछे एकजुट होना होगा।'

धरती किसी एक मजहब की नहीं:-

हसन यूसुफ ने अपने इंटरव्यू में यह भी कहा है कि हमास की मानसिकता को खत्म करने की आवश्यकता है। युसूफ ने कहा कि, 'उन्हें (कट्टर मुस्लिमों को) यह बताने की ज़रूरत है कि ये जिंदगी जीने का तरीका नहीं है। उन्होंने क्रूरता भरे काम किए हैं। हम ऐसे समूह को स्वीकार नहीं करते, जो इस्लामिक राज्य बनाने के लिए पूरी इंसानियत पर हावी होकर उनपर शासन करना चाहता है। धरती किसी एक मजहब की नहीं है। यह हमास या अन्य कट्टर मुस्लिमों का नहीं है।'

कट्टर इस्लामी विचारधारा के खिलाफ आवाज़ उठाएं हिन्दू :-

हसन युसूफ ने आगे कहा कि, 'हमास कोई ‘स्वतंत्रता सेनानी’ नहीं है, जैसा कि कई लोग दावा कर रहे हैं। वो जोकरों का एक गिरोह है, जो सबको इनकार करके जी रहा है। हमास का आम नागरिकों पर क्रूर हमले करने का एक लंबा इतिहास रहा है।' इस दौरान हमास संस्थापक के बेटे हसन ने भगवान कृष्ण, गीता और उपनिषदों को मानने वाले भारतीयों और हिंदुओं से कट्टर इस्लामी विचारधारा के खिलाफ आवाज उठाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि, 'भारत में मेरी सेना, जो लोग कृष्ण और गीता और उपनिषदों के अर्थों को समझते हैं, उन्हें कमर कसने और विश्व में इस अल्पसंख्यक समुदाय को दिखाने की आवश्यकता है कि कट्टर मुस्लिम बर्दाश्त नहीं हैं। जिस प्रकार से वे हिंसा फैलाते हैं और जिस प्रकार से वे अपना एजेंडा हासिल करना चाहते हैं, वह बर्दाश्त नहीं है। भारतीयों को आगे बढ़ना चाहिए, हिंसा के रास्ते नहीं। मगर, उन्हें दृढ़ रहना चाहिए और किसी भी प्रकार की इस्लामी दखलअंदाजी को बर्दाश्त नहीं करना चाहिए।'

हमास कोई राजनितिक समूह नहीं, मजहबी आतंकवादी समूह है:-

हसन युसूफ ने कहा कि हमास केवल एक राजनीतिक आतंकवादी समूह नहीं है। बल्कि, यह एक मजहबी (इस्लामी) आतंकवादी समूह है। युसूफ ने कहा कि, 'अगर यह एक केवल राजनीतिक समूह होता, तो हम उन पर समझौता करने और हल निकालने और हिंसा छोड़ने के लिए पर्याप्त दबाव बना सकते थे। मगर, हमास झुक नहीं सकता, क्योंकि वे मरना पसंद करते हैं न कि अपनी विचारधारा छोड़ना। वे खुद को जिहादी कहते हैं।'

हमास का एकमात्र मिशन इजराइल का खात्मा:-

हमास के संस्थापक के बेटे ने आगे कहा कि 'हमास का एकमात्र मिशन इजरायल और यहूदियों को नेस्तानाबूद करना है। वे अपने इस्लामिक राज्य बनाने की शर्त के रूप में 10 मिलियन यानी एक करोड़ यहूदियों को स्थानांतरित होने के लिए मजबूर करना चाहते हैं। लेकिन, हम उन्हें वह नहीं दे सकते जो वे माँग रहे हैं।' मोसाब हसन यूसुफ ने इस दौरान ये भी बताया कि गाजा पट्टी में हमास के वर्तमान फिलिस्तीनी नेता याह्या सिनवार अल-शिफा अस्पताल के नीचे छिपे हुए हैं। यूसुफ ने यह भी कहा कि वह अपने आप को बचाने के लिए अस्पताल में मरीजों को ढाल के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे पहले एक अन्य इंटरव्यू में युसूफ ने कहा था कि, 'गाजा को हमास से मुक्त कराकर इजरायल फिलिस्तीनी लोगों पर सबसे बड़ा उपकार कर रहा है।'

बता दें कि 7 अक्टूबर को, 2,500 से ज्यादा हमास आतंकियों ने जमीन, हवा और समुद्र से इज़रायल पर हमला किया था। इसमें 1,400 लोग मारे गए, जिनमें से ज्यादातर सामान्य नागरिक थे। इसके साथ ही 30 बच्चों समेत 230 लोगों का अपहरण कर लिया था। वहीं हमास के हमले के बाद इजरायल ने पलटवार के रूप में गाजा पर जवाबी हमला किया जो अभी तक जारी है।

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