दिवाली: 1500 किलो से अधिक शुद्ध सोने से बना है ये मंदिर, 7 साल में बनकर हुआ तैयार

4 नवंबर को दिवाली का पर्व मनाया जाने वाला है। ऐसे में हर राज्य के महालक्ष्मी मंदिरों को सजाया जा रहा है। वैसे तो महालक्ष्मी के कई मंदिर है लेकिन इनमे से कुछ खास मंदिर है जैसे केरल का पद्मनाभस्वामी मंदिर, मुंबई का महालक्ष्मी मंदिर, तिरुपति के पास तिरुचुरा का पद्मावती का मंदिर, कोल्हापुर का महालक्ष्मी मंदिर, दिल्ली का लक्ष्मीनारायण मंदिर, इंदौर का महालक्ष्मी मंदिर, हिमाचल का चौरासी मंदिर, चंबा का लक्ष्मीनारायण का मंदिर, चेन्नई का अष्टलक्ष्मी मंदिर आदि। इन सभी में से एक है तमिलनाडु का 'स्वर्ण मंदिर'।

आप सभी को बता दें कि भारतीय राज्य तमिलनाडु के जिले वेल्लू में स्थित थिरुमलई कोड गांव श्रीपुरम में स्थित महालक्ष्मी मंदिर को 'दक्षिण भारत का स्वर्ण मंदिर' कहा जाता है। कहते हैं यह मंदिर 1500 किलो से अधिक शुद्ध सोने से बना है। इसी के चलते इसे दक्षिण भारत का 'स्वर्ण मंदिर' या 'गोल्डन टेंपल' कहा जाता है। वहीं इस मंदिर के निर्माण में जितना सोना लगा है, उतना दुनिया के किसी मंदिर में नहीं लगा है। आपको बता दें कि यह मंदिर 100 एकड़ में फैला है और यह मंदिर चेन्नई से 145 किलोमीटर दूर पलार नदी के किनारे स्थित है। आपको बता दें कि इस मंदिर को बनने में लगभग 7 साल का समय लगा था और इसके निर्माण में लगभग 300 करोड़ रुपए की लागत आई थी।

आपको बता दें कि 24 अगस्त 2007 को इस मंदिर को दर्शनार्थ खोला गया था और सूरज की रोशनी में यह मंदिर बड़ा चमकता है। लेकिन रात के समय लाइट में यह मंदिर और भी ज्यादा खूबसूरत दिखता है क्योंकि उस समय इसमें लगे सोने की चमक देखते ही बनती है। वहीं मंदिर परिसर में करीब 27 फीट ऊंची एक दीपमाला भी है, जिसके प्रकार में मंदिर जगमगा उठता है। आपको बता दें कि इस स्वर्ण मंदिर का निर्माण वेल्लोर स्थित धर्मार्थ ट्रस्ट श्री नारायणी पीडम द्वारा कराया गया था।

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