जानें बलराम प्रभु के अवतार श्री नित्यानंद जी की शक्ति के बारे में...

Mar 14 2018 02:15 PM
जानें बलराम प्रभु के अवतार श्री नित्यानंद जी की शक्ति के बारे में...

 

हमारा देश धार्मिक आस्था का केंद्र माना जाता है, इस धरती पर कई बार देवी दवाओं ने मानव रूप में जन्म लिया है, इसी वजह से इसे देवभूमि भी कहा जाता है. इन अवतारों की कई कथाएं हमारे देश में प्रचलित है ऐसी ही एक कथा भगवान बलराम के अवतार नित्यानंद प्रभु की पत्नी से सम्बंधित है जो व्यक्ति को स्त्रियों का सम्मान करने की शिक्षा देती है. क्या है ये कथा आइये जानते है?

एक बार भगवान श्री नित्यानंद प्रभु की पत्नी जाहन्वा देवी भगवान कृष्ण के नाम प्रचार के लिए वृन्दावन यात्रा पर जा रहीं थीं, किन्तु मार्ग में एक गांव में वह कुछ समय के लिए रुक गयीं. उस समय गांव के निवासियों के द्वारा वैष्णव धर्म के लोगों को अच्छा नहीं माना जाता था. माता जाहन्वा देवी को देखकर उस गांव के सज्जन व्यक्तियों ने उनका स्वागत किया, लेकिन वहां के पाषंडी व्यक्तियों ने उन लोगों का उपहास किया जिन्होंने माता का स्वागत किया था. पाषंडी लोगों का कहना था की “अरे ये लोग माता चण्डी को छोड़कर इस मानव स्त्री को प्रणाम कर रहे है.” उसी दिन सभी पाषंडी लोग माता चण्डी की पूजा करने उनके मंदिर गए और प्रार्थना करने लगे कि “हे माता उन सभी दुष्टों को मार दो जो आपके अपराधी है.” 

उसी रात्री में माता चण्डी ने उन लोगों को स्वप्न में दर्शन देकर कहा कि अहंकार के वश में आकर तुम जिन भक्तों का उपहास व निंदा कर रहे हो और तुम जिनको साधारण मनुष्य कह रहे हो, वह भगवान बलराम प्रभु के अवतार श्री नित्यानंद जी की शक्ति है, जिनका नाम श्रीमति जाहन्वा ईश्वरी है. जिनके नाम लेने मात्र से भव-भय का नाश हो जाता है, जो साक्षात करुणा की मूर्ती है, और उनको मेरे प्रभु की कृपा भक्ति प्राप्त है जिनका गुणगान करने से त्रिताप की ज्वाला भी शांत हो जाती है. तुम सभी उनकी शरण में जाओ अन्यथा में तुम लोगों का वध कर दूँगी. इस स्वप्न को देखकर सभी अचानक उठकर बैठ गए व सुबह होते ही सभी जाह्न्वा देवी की शरण में चले गए और माता जाह्न्वा ने सभी को क्षमा कर भगवान कृष्ण की भक्ति में डुबो दिया.

भगवान शिव कैसे बन गए नीलकंठ जानिये इससे जुड़ी रोचक कथा

भारत में मौजूद एक ऐसा गांव जहां नहीं है हनुमान जी का मंदिर

शनि पीड़ा से मुक्ति प्रदान करते है शनिदेव के यह प्रसिध्द मंदिर

मित्रता की मिसाल पेश करते है भगवान कृष्ण के यह उदाहरण

?