वाजपेयी की कविता के सहारे शिवसेना ने बोला फडणवीस पर हमला, जानिए क्या कहा?

मुंबई: महाराष्ट्र की सत्ता से बाहर हो चुकी शिवसेना ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर हमला बोला है। शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में लिखा, डिप्टी सीएम बनने वाले अचानक सीएम बन गए तथा हम काश सीएम बनेंगे, ऐसा लगने वाले को डिप्टी सीएम पद स्वीकार करना पड़ा। इतना ही नहीं शिवसेना ने अटल बिहारी वाजपेयी की एक कविता भी साझा की है। शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में फडणवीस पर निशाना साधते हुए लिखा, इस 'क्लाइमेक्स' पर टिप्पणी, समीक्षा, परीक्षण की भरमार होने के समय 'बड़ा मन' एवं 'पार्टी के प्रति निष्ठा का पालन' ऐसा एक बचाव सामने आया। फडणवीस ने मन बड़ा करके सीएम के पद की जगह डिप्टी सीएम का पद स्वीकार किया', ऐसा तर्क भी दिया जा रहा है।

साथ ही शिवसेना ने लिखा, महाराष्ट्र में अस्थिरता निर्माण करने के लिए जो सियासी नौटंकी कराई जा रही है, उस नौटंकी के अभी और कितने भाग बाकी हैं, इस बारे में कोई भी दृढ़तापूर्वक कुछ नहीं कह सकता। घटनाक्रम ही इस प्रकार से घट रहे हैं या घटनाएं कराई जा रही हैं कि राजनीतिक पंडित, चाणक्य व पत्र पंडित भी सिर पर हाथ रखकर बैठ गए हैं। स्ट्रोक-मास्टर स्ट्रोक ऐसे ड्रामों का इस्तेमाल प्रस्तुत किया गया। एक पर्दा गिरा कि दूसरा पर्दा ऊपर, ऐसी भी घटनाएं हुई। इस पूरे सियासी ड्रामे के सूत्र पर्दे के पीछे से चलाने वाली तथाकथित 'महाशक्ति' का पर्दाफाश भी बीच के दौर में हुआ। ऐसा लग रहा था कि अब तो ड्रामा समाप्त होगा, मगर ऐसा होता नजर आ नहीं रहा। शिवसेना में बगावत कराकर महाराष्ट्र की सत्ता काबिज करना, यही इस ड्रामे का मुख्य उद्देश्य था। उसके मुताबिक इसके पात्रों ने अपना-अपना किरदार निभाया। सूरत, गुवाहाटी, सर्वोच्च न्यायालय, गोवा, राजभवन और सबसे आखिर में मंत्रालय आदि स्थानों पर इसके अलग-अलग प्रयोग पेश किए गए। 

शिवसेना ने अटल जी की कविता शेयर की:-
'छोटे मन से कोई बड़ा नहीं होता,
टूटे मन से कोई खड़ा नहीं होता
लेकिन इन पंक्तियों से पहले इसी कविता में वाजपेयी कहते हैं-
हिमालय की चोटी पर पहुंच,
एवरेस्ट विजय की पताका फहरा,
कोई विजेता यदि ईर्ष्या से दग्ध,
अपने साथी से विश्वासघात करे
तो उसका क्या अपराध
इसलिए क्षम्य हो जाएगा कि
वह एवरेस्ट की ऊंचाई पर हुआ था?
नहीं, अपराध अपराध ही रहेगा
हिमालय की सारी धवलता
उस कालिमा को नहीं ढक सकती!'

सामना में आगे लिखा, 'मन' और 'अपराध' की व्याख्या व्यक्त करने वाले वाजपेयी युग का उनकी विचारधारा देश की सियासत से कब की अस्त हो चुकी है। काले को सफेद एवं सफेद को काला बनाने वाला नया युग अब यहां प्रकट हुआ है। इसलिए छोटा मन और बड़ा मन की व्याख्या नए सिरे से कही जा रही है। करार के अनुरूप दिए गए वचन का पालन करने का 'बड़ा मन' बीजेपी ने ढाई वर्ष पूर्व ही दिखाया होता तो बचाव के नाम पर 'बड़े मन' की ढाल सामने लाने की नौबत इस पार्टी पर नहीं आई होती।

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