आखिर रोज़े क्यों रखते है मुसलमान?

रमज़ान का पवित्र महीना शुरू हो चुका है ऐसे में हर मुसलमान व्यक्ति रोज़े रखते है. इस दौरान न कुछ खाया जाता है और न कुछ पिया जाता है. यही नहीं बल्कि रमज़ान के महीने में सभी लोग एक तय वक्त पर ही सुबह को सहरी और शाम को इफ्तार खाते हैं. लेकिन क्या आपने कभी ये सोचा है कि आखिर रोज़े रखे क्यों जाते है. अगर नहीं तो आज हम आपको बताएंगे कि रमज़ान के इस पाक महीने में हर मुसलमान व्यक्ति पूरे 30 दिनों तक क्यों भूखा प्यासा रहता है.

ऐसा बताया गया है कि रमज़ान के इस पाक महीने में रोज़े रखकर दुनियाभर के गरीब लोगों की भूख और दर्द को समझा जाता है. जैसा कि हम सभी जानते है कि समय में काफी कुछ बदलाव आ गया है यही नहीं बल्कि लोग नेकी के कामो से दूर होने लगे है. ज़माना इतना आगे बढ़ गया है कि लोग दूसरों के दुख-दर्द को भूलते जा रहे हैं. तो रमज़ान के इस पवित्र महीने में इन लोगों के दर्द को महसूस किया जाता है.

इसके अलावा भी इस महीने में ना बुरा सुना जाता है, ना बुरा देखा जाता है, ना बुरा अहसास किया जाता है और ना ही बुरा बोला जाता है. ये महीना एक ऐसा महीना होता है जिसमें हर चीज पर संयम रखा जाता है. वहीं पति-पत्नी भी इस दौरान शारीरिक संबंध नहीं बनाते है.

बताना चाहेंगे कि रमज़ान के इस पाक महीने को तीन भागो में विभाजित किया गया है जिसमें 10 दिन के पहले भाग को 'रहमतों का दौर' माना गया है. फिर 10 दिन के दूसरे भाग को 'माफी का दौर' और तीसरे भाग को 'जहन्नुम से बचाने का दौर' कहा जाता है. देश के करोड़ों मुसलमान रमजान का पाक महीना आते ही सुबह से शाम तक भूखे रहते है. इस दौरान सभी लोग खाने पर ध्यान देने से ज्यादा इबादत पर ध्यान देते है.

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