मध्य प्रदेश : किसानों की जमीन बचाने को राजगोपाल का उपवास शुरू

Apr 26 2015 08:17 PM
मध्य प्रदेश : किसानों की जमीन बचाने को राजगोपाल का उपवास शुरू
style="text-align: justify;">भोपाल : मध्य प्रदेश में जमीन संबंधी समस्याओं का निराकरण नहीं किए जाने और किसानों से जमीन छीनकर उद्योगपतियों के हवाले करने के लिए बनाए जा रहे कानून के खिलाफ एकता परिषद के संस्थापक पी.वी. राजगोपाल के नेतृत्व मे किसानों व आदिवासियों ने रविवार से चार दिवसीय उपवास व धरना शुरू किया है। उपवास से पहले गांधी भवन से रैली निकाली गई। धरने में आम सभा में सीहोर जिले के नसरूल्लागंज के डोंगलापानी गांव से आए जनजातीय वर्ग के खुमान सिंह बारेला ने बताया कि उनके गांव के लगभग 200 लोग पीढ़ियों से वन भूमि पर खेती करते आए हैं, पर जब उन्होंने वन अधिकार के तहत पट्टे के लिए दावा किया तो उसे निरस्त कर दिया गया। राजगोपाल ने कहा, "खुमान सिंह की तरह प्रदेश में लाखों आदिवासी, किसान एवं वंचित लोग जमीन संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं।

हमसे प्रदेश के मुख्यमंत्री ने संवाद के लिए संपर्क किया था। जब हमने शनिवार को उनसे कहा कि पहले के विस्थापितों का पुनर्वास हो और जमीन संबंधी समस्याओं का निराकरण किया जाए, तब तक नई योजनाओं को नहीं लाया जाए। पर हम देख रहे हैं कि गरीबों को अधिकार देने के बजाय एक के बाद एक आ रही कंपनियों को जमीन दी जा रही है और उनके लिए नियम बनाए जा रहे हैं।" राजगोपाल ने जनसभा में कहा, "मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा है कि भूमि समस्या पर वह टास्क फोर्स गठित करेंगे और भूमि सुधार आयोग बनाएंगे। 

हम देखना चाहते हैं कि सरकार इस पर कितनी जल्द अमल करती है। हम सरकार पर नैतिक दबाव बनाने के लिए यहां उपवास पर बैठे हैं, पर यदि सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो हम संख्या बल के आधार पर प्रदर्शन करेंगे।" 

एकता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ़ रमन सिंह परमार ने कहा कि पिछले 10 साल में हमने कई बड़े राष्ट्रीय आंदोलन कर भारत सरकार को भूमि सुधार के लिए मजबूर किया, जिसके बाद सरकार ने कुछ काम किए और कुछ अधूरे हैं, पर मध्यप्रदेश में भूमिहीनों के लिए काम नहीं हुआ। आज भी वंचितों को अधिकार देने के बजाय उन्हें सरकारी कर्मचारियों द्वारा परेशान किया जा रहा है। किसान नेता शिवकुमार शर्मा 'कक्काजी' ने कहा कि प्रदेश में पिछले डेढ़ महीने में 72 किसानों ने आत्महत्या कर ली। प्रदेश में साढ़े 13 लाख भूमि संबंधी प्रकरण चल रहे हैं, जिससे किसान, आदिवासी एवं भूमिहीन परेशान हैं। 

फसलें बर्बाद होने किसानों को बीमा की राशि नहीं मिली रही है, क्योंकि राज्य सरकार ने इसमें अपने हिस्से की राशि जमा नहीं की है। उद्योगपतियों पर ध्यान देने वाली सरकार गरीबों एवं किसानों की समस्या पर ध्यान नहीं दे रही है। इस मौके पर एकता परिषद के राष्ट्रीय संयोजक अनीश कुमार ने बताया कि राज्य स्तर पर उपवास के समर्थन में 20 जिलों में एकता परिषद के बैनर तले आदिवासी, किसान एवं वंचित समुदाय उपवास कर रहे हैं। राजगोपाल के साथ प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए 20 कार्यकर्ता चार दिन के उपवास पर बैठ गए हैं और इनके समर्थन में एक दिन के उपवास पर सैकड़ों साथी शामिल हुए।