शिक्षा को लेकर प्रकाश जावड़ेकर के विचार

दिल्ली: बीजेपी के मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को दो साल शिक्षा विभाग की बढ़ी जिम्मेदारी मिली. एक मुलाकात के दौरान उनका कहना है निश्चित ही शिक्षा में गुणवत्ता को लेकर हमारा बड़ा फोकस था. प्रधानमंत्री जी की भी यही इच्छा थी. लाभ यह है कि सीबीएसई के 12वीं के परिणाम इस बार 83 फीसद हैं. इनमें सरकारी स्कूलों का परिणाम 85 फीसद है. औसत से यह अच्छा है. इनमें केंद्रीय और नवोदय विद्यालय का परिणाम 98 फीसद है. चार साल पहले यह परिणाम नहीं था.


उन्होंने कहा दुर्भाग्य से यूपीए के समय आठवीं तक फेल ना करने की नीति के चलते ज्यादातर स्कूल मिड-डे मील सेंटर के रूप में तब्दील होकर रह गए थे. लर्निंग आउटकम के साथ यह सब बदलेगा. नो-डिटेंशन पॉलिसी को भी राज्यों की सलाह से बदला गया. जुलाई में संसद से इसके पास होने की उम्मीद है.


उन्होंने आगे कहा मैं एक शिक्षिका का बेटा हूं. शिक्षा मतलब क्या? समझना, समझाना और विश्लेषण की ताकत आना होता है. आज रटकर परीक्षा में उतरने तक ही शिक्षा सीमित हो गई है. हम शारीरिक शिक्षा, वैल्यू एजुकेशन जोड़ना चाहते हैं. पाठ्यक्रम पहले से भारी-भरकम है। हमने सुझाव लिए हैं. अच्छे सुझाव आए हैं. कुछ अगले साल और कुछ साल 2020 तक अमल में लाए जाएंगे. फाइनल करने में अभी दो-चार महीने और लगेंगे.

 

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