रूपचतुर्दशी पर लोगों ने किया अभ्यंग स्नान

नईदिल्ली। आज देशभर में रूपचतुर्दशी का पर्व मनाया गया। तड़के सूर्योदय से पूर्व उठकर लोगों ने अभ्यंग स्नान किया। अभ्यंग स्नान के लिए बेसन, तिल, तेल, हल्दी आदि तत्वों से युक्त उबटन लगाया गया। मान्यता है कि जो भी व्यक्ति इस दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर अभ्यंग स्नान करता है। उसे नर्क की यातनाऐं नहीं भोगना पड़ती हैं। पौराणिक मान्यता है कि इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर नामक दैत्य का वधन किया था।

जब नरकासुर ने मृत्यु के पूर्व अंतिम समय में भगवान श्री कृष्ण से यातना की और उनसे एक वरदान देने को कहा, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उससे पूछा कि वह क्या मांगना चाहता है। ऐसे में उसने कहा कि जो भी आज ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करेगा उसे नर्क नहीं जाना होगा।

भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर की यह बात मान ली और कहा कि इस दिन को नरक चतुर्दशी के नाम से जाना जाएगा। हालांकि इसे रूपचतुर्दशी भी कहा जाता है। इस दिन यमराज के पूजन का भी विधान है। हालांकि यमराज का पूजन यम द्वितीया के दिन होता है।

मगर कहीं कहीं मान्यता के अनुसार यमराज का पूजन नरक चतुर्दशी के दिन किया जाता है। उन्होंने महादानी राजा रन्तिदेव की की गलती पर उन्हें क्षमा करते हुए उन्हें नर्क के कोप से मुक्त किया था। इस दिन पूजन करने के लिए रसों के तेल का दीप जलाऐं, काजल से तिलक करें और गूगल व लोभान आदि जलाऐं। इस दिन इमरती का भोग लगाना बेहद उपयुक्त माना जाता है।

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