धनतेरस के दिन यमराज की पूजा करने से दूर हो जाता है अकाल मृत्यु का डर

आज 17 अक्टूबर, मंगलवार के दिन धनतेरस मनाया जा रहा है. हमारे धर्मशास्त्रों के अनुसार आज के दिन अगर प्रदोष काल (शाम) में यमराज के नाम से दीप और नैवेद्य समर्पित किया जाये तो इससे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता. आज हम आपको धनतेरस के दिन यमराज की पूजा करने के तरीके के बारे में बताने जा रहे है.

धनतेरस के दिन यमराज की पूजा करने के लिए मिट्टी से बना हुआ एक बड़ा दिया लेकर साफ पानी से धो लें. अब इस दिए में में चौमुखी बाती लगाए, अब इस दिए में तिल का तेल से भर दें और साथ ही, उसमें कुछ काले तिल भी डाल दें. अब इस दिए की पूजा रोली, चावल एवं फूल से करे. अब अपने घर के मुख्यद्वार पर थोड़ी-सी खील या गेहूं का एक ढेर बनाकर नीचे लिखे मंत्र को बोलते हुए दक्षिण दिशा की ओर मुख करके इस दीपक को रख दें-

मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन च मया सह.
त्रयोदश्यां दीपदनात् सूर्यज: प्रीयतामिति..

इस मंत्र का जाप करने के बाद अपने हाथो में फूल लेकर नीचे लिखा मंत्र बोलते हुए यमदेव को दक्षिण दिशा में प्रणाम करे.

ऊं यमदेवाय नम:. नमस्कारं समर्पयामि..

अब इस फूल को दीपक के आगे चढ़ा दे,और अपने हाथ में एक बताशा लें कर नीचे लिखा मंत्र पढ़ते हुए उसे भी दीपक के पास रख दें-

ऊं यमदेवाय नम:. नैवेद्यं निवेदयामि..

अब अपने हाथो में थोड़ा-सा जल ले ले और फिर आचमन के लिए नीचे लिखा मंत्र पढ़ते हुए दीपक के पास छोड़ दें-

ऊं यमदेवाय नम:. आचमनार्थे जलं समर्पयामि.

आज के दिन इस तरह से यमराज की पूजा करने से वो प्रसन्न होते है और आपको अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता.

 

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