शास्त्रीजी ने दिया मितव्ययीता और बहादुरी का मंत्र

By Lav Gadkari
Oct 02 2015 10:32 AM
शास्त्रीजी ने दिया मितव्ययीता और बहादुरी का मंत्र

नई दिल्ली : उत्तरप्रदेश के मुगलसराय में लाल बहादुर शास्त्री का जन्म आज के ही दिन अर्थात् 2 अक्टूबर 1904 को हुआ था। उत्तरप्रदेश के मुगलसराय में पैदा हुए प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्मदिन महात्मा गांधी के जन्मदिन की तरह ही मनाया जाता है। दरअसल लालबहादुर शास्त्री स्वाधीन भारत के ऐसे प्रधानमंत्री थे जिन्होंने न केवल भारत की सीमाओं की रक्षा की बात कही, वहीं उन्होंने भारत में मितव्ययी प्रधानमंत्री का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया।

देश की सेवा और स्वाधीनता के बाद अपनी निष्ठा और सच्चाई में कमी नहीं आने दी गई। लालबहादुर शास्त्री द्वारा स्वाधीनता संग्राम में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई गई। स्वाधीनता के आंदोलन में गांधीवादी विचारधारा का अनुसरण किया गया। देश की सेवा की व आजादी के बाद अपनी निष्ठा व सच्चाई में कमी नहीं आने दी जाएगी। प्रधानमंत्री के तौर पर पूर्व प्रधानमंत्री स्व. लालबहादुर शास्त्री का कार्यकाल बेहद सफल रहा। इस कार्यकाल में देश ने रण क्षेत्र में कई प्रतिमान गढ़े दूसरी ओर देश में कई ऐसी योजनाओं को आयाम दिया जिससे राष्ट्र की प्रगति हुई।

लाल बहादुर शास्त्री जी से जुड़ा एक प्रसंग रहा है कि शास्त्री जी अपने मंत्रालय जाने के लिए सरकारी वाहन का उपयोग नहीं करते थे। वे पैदल ही अपने मंत्रालय जाते थे। दूसरी ओर अपने निजी कार्यों के लिए सरकारी मशीनरी का उपयोग नहीं करते थे। मगर वर्तमान में तो सरकारी मशीनरी और वाहनों का हर कार्य में प्रयोग स्टेटस सिंबल की तरह हो चुका है। उन्होंने वर्ष 1966 के दिन ताशकंद में शास्त्री का निधन हो गया। समझौते के अंतर्गत भारत, पाकिस्तान के सभी क्षेत्रों में लोग सहमत हो गए। भारतीय सेना ने पाकिस्तान से युद्ध में वियज प्राप्त की और फिर पाकिस्तान के साथ समझौता किया गया। 

जिसमें भारत और पाकिस्तान ने आपसी समझौता किया और सीमा पार न करने के नियम तय किए। ताशकंद में 11 जनवरी 1966 को लालबहादुर शास्त्री जी का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न दिया गया लेकिन उनकी मृत्यु को लेकर कई तरह के सवाल उठते रहे हैं। भारत ने इस युद्ध में लाहौर तक पहुंचकर अपने युद्ध कौशल का परिचय दिया।