चाबहार के निर्माण से पाकिस्तान ग्वादर पर हुआ मायूस

नई दिल्ली : भारत-इरान-अफगानिस्तान के मध्य चाबहार समझौते से पाकिस्तान में खलबली मच गई। दरअसल यदि यह रास्ता खुल जाता है तो पाकिस्तान पर अफगानिस्तान निर्भर नहीं रहेगा। ऐसे में चाबहार बंदरगाह, ग्वादर बंदरगाह का विरोधी नहीं है। इसमें पाकिस्तान और चीन के सम्मिलित होने का रास्ता भी खुला हुआ है। मिली जानकारी के अनुसार मध्य एशिया में भारत का दबदबा बढ़ने की संभावना भी है। मगर इस मामले में इरान ने पाकिस्तान को आश्वस्त किया है कि ग्वादर बंदरगाह का विरोध करने का उसका कोई इरादा नहीं है।

पाकिस्तान और चीन के लिए भी चाबहार बंदरगाह के रास्ते खुले हुए हैं। ऐसे में ये देश भी इस बंदरगाह का लाभ ले सकेंगे। मिली जानकारी के अनुसार पाकिस्तान चाहता है कि उसके बलूचिस्तान में ग्वादर बंदरगाह का विकास हो और उसे इससे आर्थिक लाभ हे मगर ईरान में चाबहार बंदरगाह का विकास होने पर अफगानिस्तान पाकिस्तान के रास्ते से सामान लाना कम कर सकता है। दरअसल पाकिस्तान में अफगानिस्तान को माल लाने और ले जाने में कई तरह की परेशानी होती है। यहां पर सुरक्षा भी एक बड़ा सवाल है तो दूसरी ओर अफगानिस्तान को कई तरह की परेशानियां झेलनी पड़ती हैं

मगर जब चाबहार बंदरगाह का रास्ता खुल जाएगा तो अफगानिस्तान के लिए ईरान और अन्य क्षेत्रों की आवाजाही का रास्ता सीधे खुल जाएगा उसे पाकिस्तान का सहारा नहीं लेना पड़ेगा। ऐसे में यहां से गुड्स डिलिवरिंग आसानी से और समय पर हो सकेगी। दूसरी ओर यह भी कहा गया है कि भारत के लिए कई तरह की संभावनाओं के द्वार खुल चुके हैं।

पाकिस्तान की उम्मीदों पर इस तरह से पानी फिर गया है। आशंका जताई जा रही है कि ग्वादर बंदरगाह के केवल चीनी उपयोग तक सीमित होने की संभावना जताई जा रही है। दरअसल यहां से मध्य एशिया तक भारत और अन्य देशों के जहाज अफगानिस्तान होते हुए जाते हैं मगर पाकिस्तान के क्षेत्र में उन्हें विलंब का सामना भी करना पड़ सकता है।

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