पुराने जमाने में ऐसे होता था लाइ डिटेक्टर टेस्ट, जानकर ही काँप जाएगी रूह

लाई डिटेक्टर टेस्ट के बारे में सभी जानते होंगे कि यह झूठ पकड़ने की मशीन होती है. इसका इस्तेमाल अक्सर टेस्ट अक्सर प्रचलित अपराधिक कांडों में सच उगलवाने के लिए किया जाता है. आपको बता दें, लाई डिटेक्टर टेस्ट दो प्रकार से किया जाता है, एक तो पॉलीग्राफ टेस्ट और दूसरा ब्रेन मैपिंग टेस्ट. लेकिन क्या आपको पता है कि पुराने समय में भी लाई डिटेक्टर टेस्ट किया जाता था, लेकिन उसका तरीका ऐसा था कि अपराधी सुनते ही सच बोलने लगता था. आज हम उसी के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे सुनकर आप भी हिल जायेंगे. 

दरसल, खबर के अनुसार मिस्र का 'अयिदाह कबीला' कई सालों से लाई डिटेक्टर टेस्ट से सच का पता लगा लेता है. माना जाता है कि इस कबीले के लोग बिशाह परंपरा के तहत झूठ पकड़ते हैं. इस काबिले के सच जानने के तरीके को देखकर आपकी रूह कांप जाएगी. बता दें, इस टेस्ट को तो दूर अगर आप इस टेस्ट को करते भी देख लो, तो आप फटाफट सच बोल दोगे. माना जाता है कि इस कबीले के लोग बिशाह परंपरा के तहत झूठ पकड़ते हैं. अब बता देते हैं कि क्या करते थे वो लोग.

इस टेस्ट में लोग एक लोहे की रॉड को आग में तपाकर गर्म किया जाता है. इसके बाद आरोपियों की जीभ पर लगाया जाता है. इससे वो सच बोल देता था. इसे देखकर आप भी डर के मारे सब सच बोल ही देंगे. इनकी मान्यताओं के अनुसार जो अपराधी होगा उसकी जीभ पर फफोले पड़ जाएंगे. अयिदाह कबीले के लोगों का मानना है कि झूठा या अपराधी बेचैन होने लगता है और उसकी जीभ सूखने लगती है. वहीं निर्दोष की जीभ पर लार रहती है और गर्म रॉड का असर नहीं रहता. ये कितना सही है और कितना गलत है इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है.  

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