बलिदान नहीं, योगदान की सोचो

प्रत्येक परिवार में बहुत सी अच्छाइयाँ और बहुत सी बुराईंयां तो होती ही है. पर प्रत्येक परिवार की एक सबसे बड़ी खूबी होती है परिवार का आर्थिक संबल। जिसे हम कहते है एकता, परिवार के प्रत्येक व्यक्ति का कोई न कोई स्थान व उसकी इज्जत अवश्य होती है तथा परिवार के सबसे कमजोर सदस्य को भी इस बात का पूरा भरोसा रहता है. कि संयुक्त परिवार की वजह से ही उसकी पत्नी या बच्चों को कभी भी दो वक्त की रोटी का संकट नहीं आएगा। उनके बड़े बड़े शौक भले ही पूरे न हों, पर मूलभूत जरूरतें अवश्य रूप से पूरी हो ही जाएंगी। परिवार के हर सदस्य को एक दूसरे की फिक्र होती है वे एक दूसरे की हर समस्या को समझते है व मिलजुल कर जीवन की इस राह पर कदम बढ़ाते है । 

इसी तरह हम सब लोग भी एक संयुक्त परिवार की तरह इस जागत में जीवन यापन कर रहे है, हमें भी चाहिए की हम सब मिलकर एक दूसरे का साथ दें लोगों की समस्या को समझे एक दूसरे के दुःख दर्द को जाने व उसकी मदत करें .यही व्यक्ति का सबसे बड़ा योगदान माना गया है, इस जगत में बहुत से ऐसे लोग है जो गरीबी व दुःख भरा जीवन जी रहे है कहीं कोई नये - नये कपडे पहनकर ,खुशियाँ मना रहा है कोई पटाके कोई फुलझड़ी जला रहा है .जितना मन करे उतना धन रुपया लूटा रहा है. तो कहीं कोई सूखी रोटी को ललचा रहा है. ऐसा क्यों ये सब नीति के विरुद्ध व धर्म से दूर की बात है .

हम लोग महंगे नए कपड़े पहनकर नई-नई किस्म के पटाखे फोड़ रहे हैं और उधर कोई किसान अपनी जान दे रहा है। क्या ऐसे करने में हमारी ये अनार या फुलझड़ी जलाने की खुशियाँ अपना रंग बिखेरेगीं इस बात को आप गोर से समझे की यहां हम बड़े ही मौज से खुशियाँ मना रहे है और वहीं कोई किसान या अन्य व्यक्ति जीवन की इस राह में निर्धनता के कारन अनेकों समस्याओ से जूझ रहा है जरा सोचिये और आप इस समस्या के लिये अपना योगदान अवश्य दीजिये हो सकता है आपका ये योगदान किसी व्यक्ति का जीवन संभाल दें.

उसके जीवन में खुशियाँ आ जाएँ ये बहुत ही धार्मिक कार्य है अपना योगदान अवश्य दें प्यासे को पानी भूखे को भोजन देना मानव का मूल कर्तव्य होता है. इससे आपका जीवन बहुत अच्छा व्यतीत होगा. आपके जीवन में शांति व सम्पनता बनी रहेगी क्या हमें हमारी आत्मा कोशेगी नहीं - हम इस मानव रूपी देह में जन्म के बाद यदि किसी का सहारा न बने किसी की मदत न करें लोगों की समस्या को ना समझे तो हमारा जीवन जीना फिर कैसा?

आप देखते होंगें की सहायता तो दूसरे जीव भी कर देते है. और भोजन ही मिल जाये काफी है और हम मानव होते हुए भी किसी की समस्या का निराकरण न करें तो हमारा जीवन व्यर्थ है. हमें हमेशा योगदान करने का सोचना चाहिए इस संसार में गरीबी से मरने व खुद खुशी करने वालों को रोकना चाहिए अपना योगदान दें जिससे वे गरीब बलिदान न करें अपनी इस मानव रूपी देह को नष्ट न करें.

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