सुप्रीम कोर्ट में हर सोमवार व शुक्रवार को बैठेगी संवैधानिक पीठ

नई दिल्ली : आने वाले साल की शुरुआत से हर सोमवार और शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों की एक संवैधानिक पीठ बैठेगी, जो वर्षो से लंबित चले आ रहे संवैधानिक और कानूनी मसलों पर विचार करेगी। इसकी पहली सुनवाई के लिए सूची भी बनाई गई है, जिसमें इच्छा मृत्यु का हक देने और राज्यपाल को हटाने का अधिकार सरकार को दिए जाने का मामला शामिल है। इसके अलावा जम्मू व कश्मीर से बाहर किसी मुकदमे को ट्रांसफर किया जाना और विशेष अनुमति याचिकाओं पर सुनवाई के लिए दिशा-निर्देश तय करने का भी मामला सूची में है।

अदालत ने इस संबंध में एक नोटिस जारी की है, जिसमें निपटाए जाने वाले सभी मामलों की सूची भी दी गई है। इसमें कुल 9 मामले है। इसमें नर्स अरुणा शानबाग का मामला भी है, जिस पर दो पूर्व न्यायधीशों के फैसले पर सवाल उठाए गए थे। कॉमनकॉज संस्था ने भी याचिका दायर कर लाइलाज स्थिति में पहुंच चुके व्यक्ति को इच्छामृत्यु का हक देने की मांग की है। सम्मान से जीने का अधिकार के अंतर्गत सम्मान से मरने का हक इच्छा मृत्यु का हक देता है।

केंद्र सरकार ने इस याचिका का विरोध किया था। इस पर सरकार की दलील थी कि इसे कानूनी अधिकार नही दिया जा सकता है। यह एक प्रकार से खुदकुशी है और हमारे देश में खुदकुशी के लिए उकसाना दंडनीय अपराध है। राज्यपाल को हटाए जाने का अधिकार सरकार को देने के मामले में याचिका उतरकाखंड के तत्कालीन राज्यपाल अजीज कुरैशी ने 2014 में दायर की थी।

फिलहाल कुरैशी राज्यपाल नही है। साथ ही संविधान पीठ यह भी तय करेगी कि क्या कई हत्याओं के लिए दी गई उम्र कैद की सजा अलग-अलग क्रमवार चलेगी या फिर एक साथ चलेगी। जम्मू कश्मीर से केस के स्थानांतरण का सवाल भी है।

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