अरे थारी की तो ! या है मोदी की नोटबंदी

मोदी सरकार ने नोटबंदी क्या कर दी, देश भर में भूचाल आ गया। कोई बैंकों की तरफ भाग रहा है तो किसी के कदम एटीएम की तरफ बढ़ते नजर आ सकते है। वैसे एक बात यहां उल्लेख करना प्रासंगिक है कि जितना हो हल्ला राजनीतिज्ञों द्वारा किया जाकर आम जनता या किसानों की समस्या को उजागर करने का प्रयास किया जा रहा है, उतनी समस्या आम जनता के पास है नहीं। क्योंकि आम जनता के पास जमा पूंजी होती ही कितनी.....दस-बीस या पचास हजार अथवा एक या दो लाख रूपये तक।

इसमें से भी कोई काम पढ़ जाये तो बैंक या एटीएम से निकालकर ले आये। वैसे मजदूर, किसान, सरकारी या प्रायवेट नौकरी करने वाले लोगों के पास इतना टाइम नहीं होता है कि वह रोज के हो हल्ले पर ध्यान दें। यूं भी तो विपक्षी दलों द्वारा हर दिन ही नोटबंदी के खिलाफ तमाशा खड़ा किया जा रहा है....। अब यह बात दीगर है कि शाम के समय मोहल्लों, गलियोें के ओटलों पर, पान या चाय की दुकानों पर, चैराहों पर, नोटबंदी की चर्चा आम हो गई है....और लोग मजे-मजे में ये बोलते है....अरे थारी की तो! या है मोदी जी की नोटबंदी.....! अच्छा आज अपने ’पप्पू’ अर्थात राहुल गांधी ने क्या बोला....भूचाल आ जायेगा कि बोलने नहीं दिया जा रहा है....क्या ’पप्पू’ एटीएम की कतार में लगे...आदि-आदि...या फिर केजरीवाल ने कोई नया ट्विट किया है क्या...।

नोटबंदी की मार झेलने वाले लोग, नोटबंदी का अर्थ अच्छी तरह से समझ गये है...दिलों दिमाग से मजबूत हो गये है... कैशलेस ट्राॅजिक्शन को अपनाने का प्रयास भी कर रहे है, इसलिये शाम या रात को फुर्सत के क्षणों में राजनीतिज्ञों की हुज्जतबाजी को लेकर चटखारे लगाने से लोग चूक नहीं रहे है। इसने क्या बोला, उसने क्या कहा....मोदी जी का कोई नया ऐलान तो नहीं हुआ....आज एटीएम में भीड़ थी कि नहीं, बैंकों से छोटे नोट मिले कि नहीं....आदि विषयों पर ही चर्चा प्रमुख रूप से हो रही है, क्योंकि देश में अभी यदि कोई मुद्दा है तो सिर्फ और सिर्फ नोटबंदी....।

नोटबंदी का फायदा किसे हो रहा है या किसको परेशानी हो रही है, इस बात का उल्लेख करना जरूरी नहीं, परंतु एक बात तो कहना ही पड़ेगी कि मोदी जी ने समानता का पाठ लोगों को पढ़ा दिया है, तू भी नोटों के लिये भटक और मैं भी भटकूं......तू भी ढाई लाख रूपये से अधिक होने पर टेंशन में....और मैं भी टेंशन में....! जय हो मोदी जी आपकी....!

- शीतलकुमार ’अक्षय’

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